Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. ‘डोनाल्ड ट्रंप’ के टैरिफ टेरर से कांपा भारतीय शेयर बाजार, चार दिनों में निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

‘डोनाल्ड ट्रंप’ के टैरिफ टेरर से कांपा भारतीय शेयर बाजार, चार दिनों में निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने गुरुवार को हुई भारी गिरावट ने निवेशकों के होश उड़ा दिए है। इस गिरावट का असर यह हुआ कि बीएसई (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण चार दिनों में लगभग 7.19 लाख करोड़ रुपये घटकर करीब 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। चार दिनों में सेंसेक्स करीब 1,442 अंक गिरा है, जबकि निफ्टी-फिफ्टी 405 पॉइन्ट गिर चुका है। आज गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 824.55 अंक (0.97 फीसदी) गिरकर 84136.59 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 273.10 अंकों (1.04 फीसदी) की गिरावट आई और यह 25867.65 पर बंद हुआ।

पढ़ें :- 'ये लोग देश की कीमत पर खेल खेलना चाहते हैं...' CM योगी ने विधानसभा में की कांग्रेस यूथ के प्रदर्शन की कड़ी निंदा

इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) से जुड़ी टैरिफ और रूस प्रतिबंधों की खबरें हैं। ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक का समर्थन किया है, जिसमें रूस से आयात होने वाले सामान पर कम से कम 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाना है, जो सस्ते रूसी तेल की खरीद कर रहे हैं। हालांकि यह विधेयक अभी पारित नहीं हुआ है, लेकिन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने संकेत दिया है कि अगले सप्ताह इस पर वोटिंग हो सकती है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि भारत रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान नहीं करता, तो भारतीय सामान पर और ज्यादा टैरिफ लगाए जा सकते हैं। फिलहाल अमेरिका पहले से ही कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा चुका है।

ट्रंप की बयानबाजी का मार्केट पर असर

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों (India-US Trade Relations) को लेकर ट्रंप का एक बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने भारत को मेरे पास आते देखा, सर। वे कह रहे थे कि हम पांच साल से इंतजार कर रहे हैं, हम इसे बदल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया है और प्रधानमंत्री मोदी खुद उनसे मिलने आए थे। साथ ही उन्होंने माना कि टैरिफ को लेकर मोदी उनसे खुश नहीं हैं। इन बयानों से निवेशकों को यह संदेश मिला कि आगे भी व्यापार मोर्चे पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

दूसरी ओर, बड़े शेयरों में लगातार बिकवाली ने भी बाजार को नीचे खींचा। एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे भारी वेट वाले शेयरों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। इससे पहले सप्ताह में भी इन दोनों शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत तक की कमजोरी आ चुकी थी। मेटल सेक्टर का सूचकांक करीब 1.9 प्रतिशत गिरा और इसके सभी 15 शेयर लाल निशान में बंद हुए। आईटी सेक्टर में भी करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

पढ़ें :- VIDEO : यूथ कांग्रेस AI Summit में जमकर काटा हंगामा, भारत मंडपम में टी-शर्ट उतारकर 'PM is Compromised' के लगाए नारे

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार (Chief Investment Strategist Dr. V.K. Vijayakumar) ने कहा कि हालिया बाजार चाल में कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही है। कुछ बड़े शेयरों की गतिविधि पूरे बाजार को प्रभावित कर रही है। उदाहरण के लिए, इंस्टीट्यूशन खरीदारी के बावजूद निफ्टी में गिरावट आई, जिसका कारण रिलायंस और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव रहा। यह गिरावट बुनियादी कारणों से ज्यादा तकनीकी वजहों से है।

वेनेजुएला की राजनीतिक उथल-पुथल

वैश्विक स्तर पर वेनेजुएला की राजनीतिक उथल-पुथल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिका की एक सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया है, जहां वे फिलहाल न्यूयॉर्क की जेल में हैं। इससे कच्चे तेल के वैश्विक बाजार पर असर पड़ने की आशंका है। डॉ. वीके विजयकुमार ने इस पर कहा कि ट्रंप के ट्वीट और फैसले हमेशा बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट का संभावित फैसला भी बाजार में बड़ी अस्थिरता ला सकता है।

कमजोर एशियाई बाजार

एशियाई बाजारों की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार की धारणा को कमजोर किया। जापान का निक्केई, चीन का सीएसआई 300 और एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एमएससीआई सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिका और यूरोप के वायदा बाजारों से भी ज्यादा उत्साहजनक संकेत नहीं मिले। निवेशक अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का अंदाजा लगाया जा सके. गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक दिसंबर में गैर-कृषि रोजगार में करीब 70,000 की बढ़ोतरी हो सकती है और बेरोजगारी दर 4.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।

पढ़ें :- अखिलेश यादव का मोदी सरकार पर बड़ा अटैक, बोले- क्या DEAL ने मुंह पर लगा दी SEAL? ये देश के सम्मान का मामला है, स्पष्टीकरण अपेक्षित है

 

Advertisement