लखनऊ। बीजेपी के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर (Former Union Minister Kaushal Kishore) ने पार्टी में अपनी अनदेखी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि पार्टी के अंदर कुछ लोग उनको किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के कई कार्यक्रमों में उन्हें नहीं बुलाया जाता। सरकारी कार्यक्रमों में भी कई बार उन्हें सूचना नहीं दी जाती।
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कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने कहा कि वह इससे परेशान या विचलित होने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा मैं छप्पर से निकलकर आया हूं। जमीन पर पैर रखकर खड़े होने वाले व्यक्ति हूं। मैंने 15 चुनाव लड़े हैं। इनमें 12 चुनाव हारे हैं। इसलिए हार या अनदेखी से मैं डरने वाले नहीं हूं।
लखनऊ। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर ने कहा 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी में रहते हुए लोगों ने भीतरघात कर मुझे हराया …..शोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो…..@mp_kaushal pic.twitter.com/QfV0yb5R18
— Pankaj (@AtWorkAmarUjala) August 31, 2026
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अगर जनता के हित की बात करना गलत है तो उन्हें नहीं पता कि सही क्या है?
कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने कहा कि वह यह जानना चाहते हैं कि पार्टी का उनके प्रति क्या विचार है? उन्होंने कहा कि वह लगातार जनहित के काम करते हैं। लोगों की समस्याएं उठाते हैं। अगर जनता के हित की बात करना गलत है तो उन्हें नहीं पता कि सही क्या है? उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी पद के पीछे भागना नहीं है। वह जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सामने रखने का काम करते हैं। अगर किसी कार्यकर्ता की जायज बात है तो उसकी सुनवाई होनी चाहिए।
कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने साफ किया कि वह बीजेपी से नाराज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के साथ खड़े हैं, लेकिन जब उन्हें लगता है कि विचारधारा से भटकाव हो रहा है तो उस पर बोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में आज कई कर्मठ कार्यकर्ताओं के बीच निराशा है। बूथ अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारी अपनी जायज समस्याएं लेकर थाने और तहसील जाते हैं। कई जगह उनकी सुनवाई नहीं होती। इसके बाद कार्यकर्ता उनके पास अपनी शिकायत लेकर आते हैं। कौशल किशोर के मुताबिक इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। अगर कार्यकर्ता जनता की जायज समस्या लेकर अधिकारी के पास जाता है तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए।
अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की जायज बात नहीं सुनी जाएगी तो इससे उनका मनोबल कम होगा। गलत काम के लिए सिफारिश करना अलग बात है, लेकिन अगर कोई कार्यकर्ता जनता की समस्या लेकर अधिकारी के पास जाता है तो उसकी बात सुनना जरूरी है। उनका कहना है कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल होना चाहिए। छोटे कार्यकर्ता से लेकर बड़े पदाधिकारी तक सभी की बात को महत्व मिलना चाहिए।
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कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ लोगों ने चुनाव में उनका विरोध किया था। पार्टी को इसकी जानकारी थी। इसके बावजूद उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी के खिलाफ काम करते हैं और पार्टी के उम्मीदवार का विरोध करते हैं, अगर उन्हें संरक्षण मिलता रहेगा तो कार्यकर्ताओं का विश्वास टूटेगा। पार्टी को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। संगठन में अनुशासन जरूरी है। अगर पार्टी के अंदर ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम होगा तो इससे नुकसान होगा।
सोशल मीडिया पोस्ट पर भी दी सफाई
दरअसल, एक दिन पहले ही कौशल किशोर ने अपने एक्स एकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा कि गेंद जितनी ऊंचाई तक गई थी, उतनी ही तेजी से नीचे आ रही है। अब इस पर भी उन्होंने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका बयान किसी एक पार्टी या नेता के लिए नहीं था। उन्होंने किसी पार्टी या किसी नेता का नाम नहीं लिया था। उनकी बात सभी संगठनों और व्यक्तियों पर लागू होती है। उन्होंने कहा कि जो अपने उद्देश्यों से भटक जाएगा, उसका डाउनफॉल होगा। जब किसी संगठन या व्यक्ति का विश्वास कम होता है तो उसका नुकसान होना तय है।
कौशल किशोर (Kaushal Kishore) ने कहा कि बीजेपी को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से पूरी ताकत लगानी होगी। सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने से काम नहीं चलेगा। जनता का जो विश्वास टूटा है, उसे दोबारा हासिल करना होगा। उन्होंने कहा कि 2024 में पार्टी को जिन कारणों से नुकसान हुआ है, उन कारणों को दूर करना जरूरी है। पार्टी को जनता के बीच जाकर काम करना होगा। कार्यकर्ताओं की बात सुननी होगी। कौशल किशोर ने साफ कहा कि वह अभी भी बीजेपी में हैं। वह पार्टी के वसूलों और सिद्धांतों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सिद्धांतों के साथ खड़ा होना संभव नहीं है जो जनता के हित में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें रखना चाहती है या नहीं, यह पार्टी को तय करना है। अगर कभी पार्टी कहेगी कि उनकी जरूरत नहीं है तो वह अपने भविष्य का फैसला करेंगे। फिलहाल वह बीजेपी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं और पार्टी के साथ खड़े हैं। कौशल किशोर (Kaushal Kishore) के इस बयान से साफ है कि वह पार्टी छोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन पार्टी के अंदर अपनी अनदेखी और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को लेकर खुलकर सवाल जरूर उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व उनके इन बयानों को किस तरह लेता है?