Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. राम मंदिर से 5 करोड़ ‘सोने से बनी रामचरितमानस’ गायब, देश के पूर्व गृहसचिव का दावा, बोले-मोहन भागवत से अनुरोध के बाद भी नहीं मिली रसीद

राम मंदिर से 5 करोड़ ‘सोने से बनी रामचरितमानस’ गायब, देश के पूर्व गृहसचिव का दावा, बोले-मोहन भागवत से अनुरोध के बाद भी नहीं मिली रसीद

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। देश के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण (Former Union Home Secretary Lakshmi Narayan) का दावा कि उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को सवा कुंतल वजनी रामचरित मानस (Ramcharitmanas) मंदिर ट्रस्ट (Temple Trust) को भेंट की थी। इसके एक हजार पन्नों पर सोने की परत चढ़ी थी। करीब 4 KG सोने का इस्तेमाल हुआ था। कीमत करीब 5 करोड़ रुपए थी। 3–4 महीने बाद मंदिर से यह गायब हो गई। मंदिर ट्रस्ट से आज तक इसकी रसीद भी नहीं मिली।

पढ़ें :- राम मंदिर BJP के लिए पहले राष्ट्रीय मुद्दा था, अब 'चढ़ावा चोरी' पर सवाल पूछो तो मोदी सरकार 'स्टेट सब्जेक्ट' बताकर झाड़ रही है पल्ला : प्रियंका गांधी

राम मंदिर को सोने की रामचरित मानस देने वाले पूर्व IAS अधिकारी लक्ष्मीनारायणन (Former IAS officer Lakshminarayanan) ने बताया कि शुरुआत में 5 महीने तक रामचरित मानस मंदिर में रखी गई। रोजाना इसकी पूजा होती थी। भक्त इसे देखते थे। मैं बहुत खुश था। अचानक इसे हटा दिया गया। रामचरित मानस (Ramcharitmanas) कहां है? मैंने कई बार इसका फॉलोअप लिया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। पूर्व IAS अधिकारी लक्ष्मीनारायणन ने बताया कि हैदराबाद के एक कार्यक्रम में मेरी मुलाकात आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत से कराई गई। मैंने उन्हें पूरी बात बताई। उन्होंने मेरी श्रद्धा की तारीफ़ की और वादा किया कि वे हर तरह से मेरी मदद करेंगे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

रामलला को दिए गए उपहारों व आभूषणों के गायब होने का एक नया प्रकरण भी सामने आया है। केंद्रीय गृह सचिव रहे एस. लक्ष्मीनारायण ने दावा किया है कि उनके परिवार की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय को सौंपी गई सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस को भी गायब कर दिया गया है। उनके कई बार के अनुरोध के बावजूद न तो उन्हें रसीद दी गई, न ही उसके बारे में बताया गया कि वह किस रूप में सुरक्षित रखी गई है। उनका तो यह भी दावा है कि आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत (RSS Chief Dr. Mohan Bhagwat) से भी अनुरोध करने के बाद भी उन्हें रसीद नहीं दी गई।

एस. लक्ष्मीनारायण ने एक चैनल पर सामने आकर बताया है कि उन्होंने पत्नी सरस्वती के साथ अयोध्या पहुंच कर महासचिव चंपतराय (General Secretary Champat Rai) को अप्रैल 2024 में रामचरितमानस दी थी। उस समय उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई। कहा गया कि इसे राम मंदिर के गर्भगृह में रखा जाएगा।

लंबे इंतजार के बाद चंपतराय से की मुलाकात 

पढ़ें :- राम मंदिर CEO के लिए इंटरव्यू, उम्मीदवारों से पूछा- शिखा रखते हैं? जनेऊ पहनते हैं? शराब तो नहीं पीते?

उसके बाद से वह दो बार चंपतराय के पास गए और रसीद मांगी। पहली बार नौ घंटे व दूसरी बार चार घंटे के इंतजार के बाद चंपतराय मिले। उन्होंने कहा कि रसीद दे दी जाएगी, परंतु आज तक नहीं दी गई। लगभग 147 किलोग्राम वजनी रामचरितमानस के 522 पन्नों पर सोने की परत चढ़ी थी। उसकी कीमत लगभग साढ़े चार से पांच करोड़ रुपये थी। उनका कहना था कि वह मेरी दिवंगत मां की भक्ति का खजाना रही। उन्होंने अपने जीवन के 15-18 वर्ष रामनाम लिखने में बिताया। मेरा परिवार कई दशकों से रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा।

पढ़ें :- राम मंदिर स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट पर अवधेश प्रसाद की तीखी टिप्पणी, बोले-सरकार भले ये दबा ले, लेकिन प्रभु श्री राम के मंदिर की डकैती है

आंदोलन के लिए कन्याकुमारी से भेजी गई पहली ईंट उनके ससुर के घर से आई थी। पूर्व गृह सचिव का कहना था कि जब रसीद नहीं मिली तो उनके एक परिचित ने हैदराबाद में संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलवाया। मैंने उनसे कहा तो उन्होंने आश्वासन दिया। बाद में उनकी तरफ से भी कोई रिस्पांस नहीं मिला।

Advertisement