Hariyali Teej 2024 : सावन के महीने में पड़ने वाले व्रत त्योहारों में हरियाली तीज का त्योहार विशेष है। सुहागिन महिलाएं भगवान भोलेनाथ और माता पर्वती की सदैव कृपा पाने के लिए हरियाली तीज का व्रत रखती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शंकर (Shiv ji) और माता पार्वती (Parvati ji) की पूजा की जाती हैं। हरियाली तीज पर महिलाएं अपनी सखियों के साथ मिलकर पेड़ पर झूला (Jhula) डालती है और सावन के लोकगीत गाकर इस त्योहार की खुशियां मनाती हैं।
पढ़ें :- Hanuman Jayanti 2026 : हनुमान जयंती 2026 पर आज करें बजरंगबली की पूजा, जानें भोग और विधि-विधान
पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 06 अगस्त को रात 07:52 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 07 अगस्त को रात 10: 05 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का पर्व 7 अगस्त को मनाया जाएगा।
हरियाली तीज पर व्रत का पालन करने लिए कुछ आवश्यक नियम है। इस दिन महिलाएं अपने हाथों और पैरों में मेहंदी लगाती है। हरे रंग के कपड़े पहनती हैं। हरी चूड़ियां पहनती हैं और सुहाग का सामान खरीदती हैं। परंपरा के अनुसार, इस व्रत में सास नवविवाहित बहू को कपड़े, हरी चूड़ियां, गहने, मेकअप का सामान, सिंदूर और मेहंदी देती है। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर सावन के गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और खूब नाच गाना होता है।
हरियाली तीज पूजन सामग्री (Hariyali Teej Pujan Samagri)
केले के पत्ते, बेलपत्र, धतूरा, आंक पेड़ के पत्ते, तुलसी, शमी के पत्ते, काले रंग की गीली मिट्टी, जनेऊ, धागा और नए वस्त्र. माता पार्वती जी के श्रृंगार के लिए चूड़ियां, माहौर, खोल, सिंदूर, बिछुआ, मेहंदी, सुहाग चूड़ा, कुमकुम और कंघी। इसके अलावा पूजा में नारियल, कलश, अबीर, चंदन, तेल और घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत।
हरियाली तीज के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को घेवर, मालपुआ, खीर, पंचमेवा और रवे के हलवे का भोग लगाना शुभ माना जाता है।