Haryana Congress: हरियाणा कांग्रेस में अनुशासन को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे पार्टी के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
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प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया आदेश
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि इन विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया गया है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए लिया गया है और यह कार्रवाई प्रदेश अनुशासन समिति की सिफारिश पर की गई है। साथ ही इस निर्णय को लागू करने से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी भी ली गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी इस मुद्दे पर पूरी तरह सख्त है।
"पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है!"
संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन और राज्यसभा चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध मतदान करने पर हरियाणा कांग्रेस के 5 विधायकों को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जाता है!
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हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी
अध्यक्ष
श्री :… pic.twitter.com/ds0uAkBuSD— Haryana Congress (@INCHaryana) April 16, 2026
किन विधायकों पर गिरी गाज
जिन विधायकों को सस्पेंड किया गया है उनमें शैली चौधरी, रेणु बाला, मोहम्मद इलियास पुनहाना, मोहम्मद इसराइल और जरनैल सिंह शामिल हैं। ये सभी नारायणगढ़, सढौरा, रतिया, पुनहाना और हथीन सीटों से विधायक हैं। पार्टी ने इन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
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क्रॉस वोटिंग बना वजह
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन विधायकों ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान किया था। कांग्रेस ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना है और कहा है कि इस तरह का कदम संगठन की मर्यादा के खिलाफ है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सख्त संदेश और राजनीतिक असर
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और हर नेता व कार्यकर्ता को इसका पालन करना होगा। यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने पर कड़ी कार्रवाई तय है। इस फैसले के बाद हरियाणा की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और माना जा रहा है कि इसका असर आने वाले समय में कांग्रेस की आंतरिक रणनीति और समीकरणों पर भी पड़ सकता है।