नई दिल्ली। भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि में कमी आई है। फरवरी 2025 में ये घटकर महीने के नीचले स्तर 2.9 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। यह 6 महीने का निचला स्तर है। इसका मुख्य कारण विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन को बताया जा रहा है। सरकार ने इसको लेकर एक अधिकारिक आंकड़ा जारी किया है, जिसमें ये सामने आया है। इससे पहले औद्योगिक उत्पादन की इतनी कम ग्रोथ अगस्त 2024 में दर्ज की गई थी। वृद्धि शून्य प्रतिशत पर स्थिर रही थी। एक साल पहले फरवरी में औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ 5.6 प्रतिशत थी।
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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापा गया कारखाना उत्पादन फरवरी 2024 में 5.6 प्रतिशत बढ़ा। इससे पहले सबसे कम वृद्धि दर पिछले वर्ष अगस्त में दर्ज की गई थी, जब वृद्धि दर शून्य प्रतिशत पर स्थिर रही थी।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि फरवरी 2025 में धीमी होकर 2.9 प्रतिशत रह गई। एक साल पहले इसी महीने में यह 4.9 प्रतिशत थी। खनन उत्पादन की वृद्धि दर एक वर्ष पूर्व के 8.1 प्रतिशत से घटकर 1.6 प्रतिशत रह गई।