नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने के मामले में सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि, भारतीय खिलाड़ी वर्षों से दुनिया भर में “Men in Blue” और “The Blues” “ The Blue Tigers” के नाम से पहचाने जाते रहे हैं। यह पहचान केवल जर्सी के रंग की नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की एक विरासत है।
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मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला केवल एक खेल संबंधी निर्णय नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और हमारी खेल परंपरा से जुड़ा विषय है।
भारतीय खिलाड़ी वर्षों से दुनिया भर में “Men in Blue” और “The Blues” “ The Blue Tigers” के नाम से पहचाने जाते रहे हैं। यह पहचान केवल जर्सी के रंग की नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की एक विरासत है। आज यह समझना कठिन है कि इस ऐतिहासिक पहचान को बदलने की आवश्यकता आखिर क्यों महसूस की गई। प्रश्न किसी रंग का नहीं है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और जनभावनाओं के सम्मान का है।
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला केवल एक खेल संबंधी निर्णय नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और हमारी खेल परंपरा से जुड़ा विषय है।
भारतीय खिलाड़ी वर्षों से दुनिया भर में “Men in Blue” और “The Blues” “ The Blue Tigers” के नाम से पहचाने जाते रहे हैं। यह…
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— Mallikarjun Kharge (@kharge) August 1, 2026
उन्होंने आगे लिखा, केसरिया, सफेद और हरा हमारे तिरंगे में तीनों रंग हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज में भी यह सम्मानपूर्वक स्थान पाता है। दुर्भाग्य यह है कि जिन लोगों की वैचारिक परंपरा का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई भी योगदान नहीं रहा, वे आज हर राष्ट्रीय प्रतीक और हर सार्वजनिक संस्थान पर अपनी वैचारिक छाप छोड़ने की जल्दबाज़ी में दिखाई देते हैं। इतिहास जानता है कि RSS ने तिरंगे का कट्टर विरोध किया था और सरदार पटेल ने उन्हें चेतावनी भी दी थी।
कभी सड़कों के पेवमेंट पर, कभी संसद के कर्मचारियों के वस्त्रों में, कभी दूरदर्शन के logo पर और अब खिलाड़ियों की जर्सी में-बिना व्यापक सार्वजनिक सहमति के। राष्ट्रीय प्रतीकों, खेलों और खिलाड़ियों को संकीर्णता से भरे राजनीतिक प्रयोगों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार और संबंधित संस्थाओं को इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए तथा यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय बिना हॉकी इंडिया के Executive Board की जानकारी और सहमति के कैसे लिया गया।