नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाला है। FPI ने मार्च 2026 में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब डॉलर) निकाले हैं। मार्च (20 मार्च तक) में FPI ने हर कारोबारी दिन शुद्ध बिकवाल बने रहे हैं। मार्च 2026 में अबतक की यह निकासी 2026 की सबसे अधिक मासिक निकासी है। विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं (BFSI) के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई है। यह भारी बिकवाली फरवरी में आई 22,615 करोड़ रुपये की तेजी के बाद हुई है, जो 17 महीनों में सबसे ज्यादा थी। ताजा बिकवाली के बाद 2026 में अब तक का कुल FPI आउटफ्लो 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में (88,180 करोड़ रुपये) पैसा निकालने के भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर गहरे प्रभाव पड़ते हैं। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा की जा रही अंधाधुंध बिकवाली ने न केवल सेंसेक्स और निफ्टी को लाल निशान में धकेल दिया है, बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
जानकारों के मुताबिक, FPI द्वारा भारतीय रुपये को बेचकर अमेरिकी डॉलर खरीदने की होड़ से रुपये की वैल्यू में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर आयातित सामानों की बढ़ती कीमतों पर पड़ रहा है। कच्चे तेल के उछलते दाम और कमजोर होता रुपया भारत के ‘आयात बिल’ को बेतहाशा बढ़ा रहे हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और माल ढुलाई महंगी होने के कारण आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।
विदेशी मुद्रा की इस भारी निकासी ने देश के चालू खाता घाटे (CAD) को भी गहरे संकट में डाल दिया है, जिससे वैश्विक रेटिंग एजेंसियों के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। दूसरी ओर, आयातित कच्चे माल पर निर्भर कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने से उनके मुनाफे में बड़ी गिरावट की आशंका है, जिसका सीधा असर उनकी भविष्य की ग्रोथ पर पड़ेगा। हालांकि, LIC और म्यूचुअल फंड्स जैसे घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार को थामने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यदि विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली जारी रही, तो बाजार में ‘फ्री फॉल’ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है जो छोटे निवेशकों की पूंजी को पूरी तरह स्वाहा कर सकती है।
निकासी की मुख्य वजहें:
1. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों में डर पैदा किया है।
2. क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने भारत में महंगाई और राजकोषीय घाटे की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
3. डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट ने विदेशी निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित किया है।
4. अमेरिका में बांड की बढ़ती यील्ड के कारण भी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगा रहे हैं।
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रिपोर्ट-सुशील कुमार साह