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ISRO के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने सूरज के सबसे बड़े रहस्य से उठाया पर्दा,सूर्य की बाहरी परत सतह से 4 करोड़ डिग्री तक ज्यादा गर्म

By santosh singh 
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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 (Solar Mission Aditya-L1) ने सूरज से जुड़े एक सबसे बड़े और उलझे हुए रहस्य से पर्दा उठाया है। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि सूर्य का बाहरी हिस्सा यानी कोरोना उसकी सतह से लाखों गुना ज्यादा गर्म क्यों रहता है और सौर तूफानों के दौरान भारी मात्रा में ऊर्जा गंवाने के बाद भी वह अपनी ठंडक या ऊर्जा को कैसे बरकरार रखता है?

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क्या सूर्य का सबसे बड़ा रहस्य सुलझा?

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रो. आर. रमेश (Prof. R. Ramesh) के अनुसार, वैज्ञानिकों ने दो प्रमुख तंत्रों (मैकेनिज्म) का अध्ययन किया। इसमें पहला, सूर्य की सतह की खौलती हुई गतिविधियों से पैदा होने वाली तरंगें और दूसरा, सूर्य के वायुमंडल में उलझे हुए चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का टूटना और फिर से जुड़ना। सूर्य की सतह की खौलती हुई गतिविधियों से पैदा होने वाली तरंगों का हुआ अध्ययन, वैज्ञानिक बोले, चुंबकीय रेखाओं का टूटना और जुड़ना है असली ताकत।

सूर्य की सतह का तापमान कितना?

द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स पत्रिका (The Astrophysical Journal Letters) में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, सामान्य नियमों के विपरीत, सूर्य की सतह का तापमान लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस है, जबकि इसके केंद्र (कोर) का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस है। हालांकि, हैरानी वाली बात ये है कि सतह से बहुत दूर स्थित कोरोना का तापमान 20 लाख से 40 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

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आदित्य -एल1 पर लगे विजिबल एमिशन लाइन के डेटा का इस्तेमाल

5 अगस्त 2024 को हुए एक शक्तिशाली सौर विस्फोट (Powerful Solar Eruption) का अध्ययन करने के लिए आदित्य-एल1 पर लगे विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ के डेटा का उपयोग किया गया। इसमें पता चला कि सतह की तरंगें कोरोना की कुल ऊर्जा जरूरत का मात्र सात फीसदी हिस्सा ही योगदान देती हैं। वहीं, शेष 93 फीसदी ऊर्जा का मुख्य स्रोत चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पुनः जुड़ना है। विस्फोट के बाद लगभग 10 घंटों के भीतर इन रेखाओं ने अपनी स्थिति पुनः प्राप्त कर ली और ऊर्जा की भरपाई कर ली।

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