मुंबई। भारतीय सिनेमा और संगीत जगत में यूं तो बहुत से दर्द भरे गीत बने, लेकिन मोहम्मद रफी की आवाज में गाया गया एक ऐसा गाना है जिसे ‘सदी का सबसे दर्द भरा गीत’ (Sad Song of the Century) माना जाता है। साल 1970 में आई एक कल्ट क्लासिक फिल्म ‘हीर रांझा’ का ऐतिहासिक गीत ‘ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं’ आज भी हर टूटे दिल की आवाज बना हुआ है। आपको बता दे कि साल 2026 में इस सदाबहार गाने की रिलीज को पूरे 56 साल हो चुके हैं।
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राज कुमार के अभिनय और रफी की आवाज का जादू
आपको बता दे कि यह गाना बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राज कुमार पर फिल्माया गया था। पर्दे पर राज कुमार के बेमिसाल अभिनय और प्लेबैक सिंगर के रूप में मोहम्मद रफी की मखमली व दर्द भरी आवाज के संगम ने इस गाने को अमर बना दिया। आज भी जब विरह या अधूरे प्यार के गानों की बात होती है, तो यह गीत सबसे उपर आता है। इस कल्ट क्लासिक गीत को गायक मोहम्मद रफी, संगीतकार मदन मोहन और गीतकार कैफ़ी आज़मी जैसे तीन महारथियों ने इसे तैयार किया था।
फिल्म ‘हीर रांझा’ का अनोखा रिकॉर्ड
यह फिल्म चेतन आनंद के निर्देशन में बनी थी जिसका नाम सिनेमाई इतिहास में एक बेहद अनोखे प्रयोग के लिए दर्ज है। इस पूरी फिल्म के संवाद (Dialogues) सामान्य भाषा में न होकर पूरी तरह से कविता और शायरी (Verse) के रूप में थे। फिल्म के इस अनोखे फॉर्मेट और मोहम्मद रफी के गीत ने ‘हीर रांझा’ को भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित कर दिया।