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Jal Jeevan Mission Scam : राजस्थान के पूर्व मंत्री गिरफ्तार, फर्जी प्रमाणपत्रों पर करीब 960 करोड़ रुपये का टेंडर दिलाने का आरोप

By संतोष सिंह 
Updated Date

जयपुर। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) से जुड़े कथित 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (Rajasthan Anti-Corruption Bureau) बड़ा ने बड़ा एक्शन लिया है। एसीबी (ACB) की एसआईटी (SIT) ने गहलोत सरकार के पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी (Former PHED Minister Mahesh Joshi) को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी (ACB)  ने प्रकरण संख्या 245/2024 में कार्रवाई करते हुए उन्हें गुरुवार सुबह करीब साढ़े चार बजे जयपुर स्थित आवास से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एसीबी (ACB)  के अनुसार मामले में महेश जोशी से पूछताछ और जांच जारी है।

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जांच एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)  में कथित व्यापक भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। एसीबी (ACB)  का कहना है कि शुरुआती जांच में बड़े स्तर पर मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसी क्रम में आरोपी पूर्व मंत्री को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एसीबी ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना है।

जांच में खुलासा : फर्जी प्रमाणपत्रों से 960 करोड़ के टेंडर लेने का आरोप

जांच में खुलासा हुआ है कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कम्पनी (M/s Shri Ganpati Tubewell Company) के प्रोपराइटर महेश मित्तल (Proprietor: Mahesh Mittal) और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कम्पनी (M/s Shri Shyam Tubewell Company) के प्रोपराइटर पदमचंद जैन (Proprietor: Padamchand Jain) ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON International Limited) के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार किए। आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान में विभिन्न टेंडर हासिल किए गए। एसीबी के अनुसार तत्कालीन पीएचईडी मंत्री महेश जोशी (PHE Minister Mahesh Joshi) और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने निजी दलाल संजय बड़ाया सहित अन्य लोगों के साथ मिलीभगत कर इन फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई। जांच में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है। एसीबी (ACB)  ने कहा कि यह मामला केवल कुछ टेंडरों तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं।

नियम बदलकर टेंडर प्रक्रिया में ‘टेंडर पुलिंग’ का आरोप

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जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को नियमों के विपरीत शामिल किया गया। आरोप है कि इससे बोली लगाने वालों की पहचान उजागर हो जाती थी और टेंडर पुलिंग संभव हो पाती थी। एसीबी (ACB) के मुताबिक इस प्रक्रिया के कारण 30 से 40 प्रतिशत तक अप्रत्याशित ऊंचा टेंडर प्रीमियम मिला, जिसे विभागीय अधिकारियों ने मंजूरी दी। एजेंसी का दावा है कि इससे बड़े पैमाने पर पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के प्रमाण मिले हैं। कुल टेंडरों की राशि लगभग 20 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में आगे भी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच जारी रहेगी।

पहले 11 आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार घोषित

एसीबी (ACB) के अनुसार इस प्रकरण में अब तक 11 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी शामिल हैं। एक निजी व्यक्ति को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। तीन फरार आरोपियों के खिलाफ अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं और उन्हें उद्घोषित अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। एसीबी (ACB)  ने बताया कि आरोपी महेश जोशी (Mahesh Joshi) को अदालत में पेश करने के बाद 11 मई 2026 तक एसीबी (ACB) रिमांड मंजूर किया गया है और मामले में आगे पूछताछ जारी रहेगी।

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