नई दिल्ली : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी (Jamiat Ulema-e-Hind President Arshad Madani) ने शनिवार को अपने एक्स पोस्ट पर लिखा कि सांप्रदायिक शक्तियां और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र (Hindu Nation) बनाने का सपना देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नफरत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र (Hindu Nation) का सपना देखने वालों को नेपाल (Nepal) से सबक लेना चाहिए। एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब जालिमों के गले में जंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ के साये (रास्ते) में तरक्की करेगा।
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हिंदू राष्ट्र का सपना देख रहे कुछ संगठन
अरशद मदनी (Arshad Madani) ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियां और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र (Hindu Nation) बनाने का सपना देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था, लेकिन अंततः वह व्यवस्था समाप्त हो गई और वहां लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई।
The country’s sectarian forces and certain organizations are dreaming of establishing a Hindu Rashtra, whereas they should learn a lesson from the history of the neighbouring country, Nepal. In the recent past, people with similar ideologies established a Hindu state in Nepal,…
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) February 7, 2026
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उन्होंने कहा कि इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है, जब वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो, न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर।
कोई भी साजिश नहीं होगी सफल
मदनी ने कहा कि सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र (Hindu Nation) बनाने की कोई भी साजिश सफल नहीं हो पाएगी। सेक्युलरिज्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि जो कौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है, उसे कुर्बानियां देनी पड़ती हैं।
मदनी का कहना है कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे स्वयं मिट गए। उन्होंने आगे कहा, “हम एक जीवित कौम हैं, और जीवित कौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा, जब अत्याचार का अंत होगा और यह देश फिर से प्रेम, सद्भाव और न्याय के रास्ते में आगे बढ़ेगा।