Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. मृत्यु के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री को मिला न्याय, 25 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में कोर्ट ने पत्नी सहित किया दोषमुक्त

मृत्यु के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री को मिला न्याय, 25 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में कोर्ट ने पत्नी सहित किया दोषमुक्त

By Satish Singh 
Updated Date

नई दिल्ली। मुंबई की सेशन कोर्ट कि विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजीत पवार को क्लीन चिट दे दी है। उपमुंख्यमंत्री 25 हजार करोड़ के घोटाले के मामले में क्लीन चिंट दी गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री पर महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (Maharashtra State Co-operative Bank) से जुड़े कथित 25 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में नाम आया था। बता दे कि कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इय रिपोर्ट में महाराष्ट्र के दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को क्लीन चिट दी गई थी। अजीत पवार के साथ कोर्ट ने उनकी पत्नी और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Maharashtra Deputy Chief Minister Sunetra Pawar) को भी क्लीन चिट दे दिया है।

पढ़ें :- महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, बोलीं-'अजित पवार की मौत की हो CBI जांच', इस घटना की सच्चाई सामने आना जरूरी

बता दें कि विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने ईओडब्लू की सी समरी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि मामले में किसी भी तरह का आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता है। अदालत ने माना कि तथ्यों की गलत दिखा कर अजीत पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जब जांच की गई तो आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई। कोर्ट के इस फैसले से अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी राहत मिली है। बता दे कि ईओडब्लू की जांच में अजीत पवार की पत्नी और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी दोषमुक्त पाया गया है। जांच एजेंसी को मुकदमा चलाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे। इस बाद जांच एजेंसी ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।

इस मामले में में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Social activist Anna Hazare) और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका को भी कोर्ट ने खरिज कर दिया है। सभी याचिकाकर्ताओं ने पूर्व उपमुख्यमंत्री पर आरोप लगाया था कि एजेंसी ने जांच के दौरान कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया है। इसके बाद भी कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

Advertisement