Kerosene stove : देश में चल रहे एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए केरोसीन तेल की बिक्री को अस्थायी तौर पर मंजूरी दे दी है। 29 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर केरोसीन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आम लोगों को खाना बनाने और रोशनी के लिए वैकल्पिक ईंधन मिल सके। ऐसे में केरोसीन स्टोव इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी।
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एक मिट्टी के तेल का स्टोव एक सरल सिद्धांत पर काम करता है। इसमें एक ईंधन टैंक, एक बत्ती और एक बर्नर असेंबली होती है। यदि आप पुराने केरोसीन स्टोव पर खाना बनाने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। स्टोव के इस्तेमाल के समय उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करना चाहिए। स्टोव को कुशलतापूर्वक काम करते रहने के लिए नियमित सफाई और बत्ती बदलना आवश्यक है। कई आधुनिक मिट्टी के तेल के स्टोव में सुरक्षा तंत्र शामिल होते हैं, जैसे कि स्वचालित शट-ऑफ वाल्व।
हीट करें: स्टोव जलाने से पहले स्पिरिट कप में थोड़ा केरोसीन या मिथाइलेटेड स्पिरिट डालकर बर्नर को गर्म करें।
प्रेशर : बर्नर गर्म होने के बाद ही पंप के जरिए टैंक में दबाव बनाएं, तभी सही लौ मिलेगी।
बर्नर साफ रखें: बर्नर के छेद में गंदगी या कालिख जमा होने से पीली लौ और खतरा बढ़ सकता है, इसलिए पतली पिन से सफाई करते रहें।
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चेक करें लीकेज : स्टोव इस्तेमाल से पहले टैंक और पाइप में किसी तरह का लीकेज न हो, यह जरूर जांच लें।
खुली जगह पर उपयोग करें: हमेशा हवादार जगह पर स्टोव का इस्तेमाल करें, ताकि धुआं और गैस से नुकसान न हो।
कैसे काम करता है केरोसीन प्रेशर स्टोव?
केरोसीन प्रेशर स्टोव एक खास तकनीक पर काम करता है। इसमें पहले टैंक के अंदर हवा का दबाव बनाया जाता है, जिससे केरोसीन गर्म पाइप के जरिए गैस में बदलकर नोजल से बाहर निकलता है। यह गैस हवा के साथ मिलकर जलती है और तेज नीली लौ पैदा करती है, जो बड़े स्तर पर खाना बनाने के लिए उपयुक्त होती है।