बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन (Bangladesh President Mohammed Shahabuddin) ने इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी उनके सहयोगी ने दी। उनका कार्यकाल अभी लगभग दो साल बाकी थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उनके इस्तीफे की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
नई दिल्ली। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन (Bangladesh President Mohammed Shahabuddin) ने इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी उनके सहयोगी ने दी। उनका कार्यकाल अभी लगभग दो साल बाकी थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उनके इस्तीफे की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
क्या रही इस्तीफे की वजह?
इस्तीफे के कारण के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर 76 वर्षीय नेता ने द डेली स्टार अखबार (The Daily Star Newspaper) को बताया कि वह स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। राष्ट्रपति भवन (President’s House) के एक प्रवक्ता ने पीटीआई को बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए उनके कार्यालय से रवाना हो गए हैं। त्यागपत्र संसदीय अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद (Parliamentary Speaker Hafizuddin Ahmed) को सौंपा जाएगा, जो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।
कौन बनेगा बांग्लादेश के अगला राष्ट्रपति?
वहीं, बांग्लादेशी मीडिया की खबरों और स्वतंत्र खुलासों ने कैबिनेट सचिव नसीमुल गनी (Cabinet Secretary Nasimul Ghani) का नाम शीर्ष पद के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन (President Mohammed Shahabuddin) अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए चुने गए थे। वर्ष 2024 के जुलाई-अगस्त में छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं। उस राजनीतिक बदलाव के बाद भी शहाबुद्दीन अपने संवैधानिक पद पर बने रहने वाले इकलौते शीर्ष पदाधिकारी थे।
कौन हैं मोहम्मद शहाबुद्दीन?
मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्म पश्चिमोत्तर पबना जिले में हुआ था। वे 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अवामी लीग के छात्र और युवा विंग के नेता थे। इतना ही नहीं, शहाबुद्दीन ने 1971 के मुक्ति संग्राम में भी भाग लिया था और 15 अगस्त, 1975 को बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की उनके परिवार के सदस्यों के साथ एक सैन्य तख्तापलट में हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन करने के लिए उन्हें कैद भी किया गया था।
उस तख्तापलट के कारण अवामी लीग सरकार भी गिर गई थी। बाद में 1982 में वे देश की न्यायिक सेवा से जुड़े। बाद में जब साल 1996 के चुनावों में अवामी लीग वापस सत्ता में लौटी तो शहाबुद्दीन ने बंगबंधु हत्याकांड की जांच दल के समन्वयक के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने राजनीति में पदार्पण किया। राजनीति में आने के बाद वे अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य बने।