पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज :: नेपाल में हाल ही में हुए चुनावों में जेन-जी आंदोलन की लहर के बाद सत्ता में आई नई सरकार से देश के युवाओं को बड़ी उम्मीदें थीं। रैपर से नेता बने बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद माना जा रहा था कि नई व्यवस्था देश में पारदर्शिता और तेज बदलाव लाई जाएगी।
पढ़ें :- जयपुरिया संस्थान के 30वां दीक्षांत समारोह में 358 छात्रों को डिप्लोमा और दो शोधार्थियों को फैलोशिप से किया गया सम्मानित
लेकिन सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद मतभेद और विवाद सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब देश के होम मिनिस्टर सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बुधवार को उन्होंने अचानक त्यागपत्र का ऐलान किया।
क्यों दिया गुरुंग ने इस्तीफा?
सुदन गुरुंग की व्यक्तिगत संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर सोशल मीडिया सहित कई मंचों पर सवाल उठने लगे थे। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने स्वयं नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और पद छोड़ने का निर्णय लिया।
अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और शुचिता सबसे अहम है।
पढ़ें :- Lucknow Gaming Zone Fire : लखनऊ भीषण आग में जान बचाने के लिए ग्रिल पकड़ लटका , फिर जमीन पर आकर गिरा शख्स
गुरुंग ने कहा—
“मैं जनता की आलोचना को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण लोगों का भरोसा है।”
“जेन-जी आंदोलन पारदर्शिता के लिए था, इसलिए हम पर भी लागू होता है”
गुरुंग ने स्वीकार किया कि यदि जेन-जी आंदोलन पारदर्शिता, ईमानदारी और बेहतर शासन के लिए था, तो वही सिद्धांत उनके लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा—
पढ़ें :- Lucknow Fire : कांग्रेस,बोली-दर्दनाक हादसे की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
“सरकार हमारे 46 भाइयों-बहनों के बलिदान के बाद बनी है। ऐसे में हम पर नैतिकता का पालन करना ही चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे से सरकार पर सवाल उठना बंद हो जाएंगे और हितों का टकराव खत्म होगा।
साफ-सफाई वाली जांच की मांग
सुदन गुरुंग ने अपनी वित्तीय होल्डिंग्स की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
उन्होंने युवाओं और मीडिया से अपील की कि जीवन में शुचिता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष
पढ़ें :- NEET Re-Exam : अब तो इस्तीफ़ा दे दो धर्मेन्द्र प्रधान, नीट री-एग्जाम में कई डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट के अरेस्ट होने पर अखिलेश यादव ने घेरा
नेपाल की राजनीति में यह इस्तीफा एक बड़ा संकेत है कि नई सरकार नैतिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता को लेकर दबाव में है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में शुरू हुए “नए नेपाल” के वादे पर यह पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है।