Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. जॉब्स
  3. सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब तीन साल के बजाय एक साल की वकालत करके बन सकेंगे जज

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब तीन साल के बजाय एक साल की वकालत करके बन सकेंगे जज

By Sushil Sah 
Updated Date

नई दिल्ली। वैसे युवा जो निचली अदालतों (Lower courts) में जज बनने की तैयारी कर रहे हैं, उनको सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। आज 21 अगस्त, शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने मई 2025 के फैसले में संशोधन करते हुए एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए तीन साल की अनिवार्य वकालत की शर्त को कम करते हुए एक साल कर दिया है। इस सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला लिया और समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया।

पढ़ें :- पूर्व DGP बृज लाल का बड़ा बयान, कहा- जंगलों में रहने वाले नक्सलियों से ज्‍यादा खतरनाक होते हैं 'दिमागी नक्सली'

इस फैसले के बाद क्या बदलेगा?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उम्मीदवारों के लिए परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल की जगह अब केवल एक साल का वकालत का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा जिन न्यायिक परीक्षाओं के नोटिफिकेशन 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होंगे, उनके लिए यह अनुभव जरूरी नहीं होगा। इसका मतलब हैं कि अब इस अवधि में बिना अनुभव वाले उम्मीदवार भी परीक्षा दे सकेंगे। हालांकि इस दौरान बिना अनुभव के चुने गए उम्मीदवारों को सीधे जज नहीं बनाया जाएगा। इसके लिए वे पहले एक साल के लिए ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में काम करेंगे। साथ ही उन्हें एक साल की स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप से भी गुजरना होगा। यह नया नया संशोधित नियम 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होनेवाले परीक्षाओं के नोटिफिकेशन पर पूरी तरह से लागू होगा।

कोर्ट ने क्यों दी राहत?

कोर्ट ने ये माना कि 2025 में बिना किसी ट्रांजिशन पीरियड के अचानक तीन साल की प्रैक्टिस का नियम लागू करने से नए लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के सामने भारी मुश्किलें खड़ी हो गई थीं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जज बनने के लिए वकालत का अनुभव होना बेहद जरूरी है, लेकिन इस नियम की वजह से युवाओं को एकाएक असुविधा नहीं होनी चाहिए।

पढ़ें :- बोफोर्स तोप घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आखिरी अपील, खत्म हुआ 40 साल पुराना केस

पिछले फैसलों में क्या हुआ?

गौर करने वाली बात यह है कि मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे जज बनने की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा कम से कम तीन साल की वकालत की शर्त भी अनिवार्य कर दी थी। इसके बाद अदालत ने इस फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ऐसी स्थिति में नए फैसले के तहत कोर्ट ने समिक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए अब तीन साल की शर्त को एक साल कर दिया है।

Advertisement