Judiciary News in Hindi

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब तीन साल के बजाय एक साल की वकालत करके बन सकेंगे जज

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब तीन साल के बजाय एक साल की वकालत करके बन सकेंगे जज

नई दिल्ली। वैसे युवा जो निचली अदालतों (Lower courts) में जज बनने की तैयारी कर रहे हैं, उनको सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। आज 21 अगस्त, शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने मई 2025 के फैसले में संशोधन करते हुए एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए तीन साल

पूर्व DGP बृज लाल का बड़ा बयान, कहा- जंगलों में रहने वाले नक्सलियों से ज्‍यादा खतरनाक होते हैं ‘दिमागी नक्सली’

पूर्व DGP बृज लाल का बड़ा बयान, कहा- जंगलों में रहने वाले नक्सलियों से ज्‍यादा खतरनाक होते हैं ‘दिमागी नक्सली’

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजलाल (BJP MP Brij Lal) ने रविवार को “दिमागी नक्सल” (Intellectual Naxal) कहे जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे जंगल के इलाकों में सक्रिय उग्रवादियों की तुलना में देश

जंतर-मंतर बवाल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी नसीहत- ‘लाठी-गोली नहीं, युवाओं को काउंसलिंग की जरूरत’

जंतर-मंतर बवाल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी नसीहत- ‘लाठी-गोली नहीं, युवाओं को काउंसलिंग की जरूरत’

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले के खिलाफ हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश ‘सूर्यकांत’ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया

चलने के लिए दो लोगों का सहारा… पर 34 साल पुराना गुनाह नहीं भूला कानून: बिहार के 84 वर्षीय बुजुर्ग को हुई जेल

चलने के लिए दो लोगों का सहारा… पर 34 साल पुराना गुनाह नहीं भूला कानून: बिहार के 84 वर्षीय बुजुर्ग को हुई जेल

वैशाली,बिहार: कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं और वो तब तक पीछा नहीं छोड़ते जब तक इंसाफ न हो जाए। बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो इस बात की जीती-जागती मिसाल है। जिस 84 साल की उम्र में लोग

कोर्ट भवन न्याय का मंदिर होना चाहिए, न कि सात सितारा होटल- मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई

कोर्ट भवन न्याय का मंदिर होना चाहिए, न कि सात सितारा होटल- मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई

नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई (Chief Justice of India Bhushan Gavai) ने कहा कि कोर्ट का भवन लोकतांत्रिक मूल्यों (The court building is based on democratic values) और जनता की सेवा की भावना को दर्शाना चाहिए, न कि वैभव और विलासिता को नहीं। यह बात मुख्य न्यायाधीश

CJI गवई ,बोले -जब लोकतंत्र के तीनों स्तंभ साथ काम करेंगे, तभी साकार होंगे संविधान के सिद्धांत

CJI गवई ,बोले -जब लोकतंत्र के तीनों स्तंभ साथ काम करेंगे, तभी साकार होंगे संविधान के सिद्धांत

मुंबई। देश के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई (Chief Justice Bhushan Gavai) ने बुधवार को कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तंभ कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका हैं। ये सभी नागरिकों के कल्याण के लिए अस्तित्व में हैं। कोई भी संस्था अलग-थलग रहकर कार्य नहीं कर सकती। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि