नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक बिल (Anti-Paper Leak Bill) पर चर्चा की शुरुआत राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने की है। मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि’पेपर चुराने वाले बचते रहे…’ शायरी के साथ चर्चा की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि हमने 2024 में ही मजबूत कानून की मांग की थी। तब आपने हमारी मांग नहीं मानी। तब आप जल्दीबाजी में बिल लेकर आए थे। चुनाव सामने थे। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) पर थे। तब क्रेडिट नहीं मिल पाता। हम इस संशोधन बिल का स्वागत करते हैं, लेकिन इसमें भी आपका इंटेंशन नहीं है। ये जो माहौल चल रहा है, उसको ठंडा करने के लिए ये बिल लाया गया है। इसमें समस्या को सुलझाने की मंशा नहीं है। यह बिल अभी भी अधूरा है।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि दो महीने से जो हालात बने है, देश में छात्र सड़कों पर आए और प्रधानमंत्री को प्रधान को हटाना पड़ा। युवाओं की ताकत के आगे झुकना पड़ा। अपनी कुर्सी जाने के डर से युवाओं की डिमांड माननी पड़ी। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) उनके आवास के बाहर पहुंच गए, तब उनको लगा कि अब इस बात को बढ़ाना ठीक नहीं है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए डर से उनको धर्मेंद्र प्रधान को हटाना पड़ा। छात्र जब महीनों से धरने पर बैठे थे, तब आप क्यों नहीं उनकी बात सुनी। जब वह धरने पर बैठे थे, उसके दो दिन बाद ही नड्डा साहब जाते तो छात्र लाठी नहीं खाते। ये सब नहीं भुगतना पड़ता। अमित शाह साहब दिख ही नहीं रहे। छोटी-छोटी बातों पर आकर अपनी बात रखते हैं, इस तरफ क्यों नहीं आते, मुझे मालूम नहीं। प्रधानमंत्री भी मुंह नहीं खोल रहे। आप गृह मंत्री हो, कानून-व्यवस्था देखते हो, दिल्ली में इतनी गड़बड़ी पर भी मुंह नहीं खोल रहे हो। क्या स्टिच लगा लिया है क्या मुंह पर। नहीं, मैं नहीं आऊंगा। आपको जो सबक सिखाया है छात्रों ने, वह फिर आकर सबक सिखा देंगे।
मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि हजारों छात्रों ने संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च किया। वे संवाद चाह रहे थे। उनको मिला लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन, रेलवे स्टेशन बंद, इंटरनेट बंद। इससे छात्र उचक गए। आप शांति से उनको संभाल नहीं सके। कई छात्र घायल हो गए। कई बच्चों को आंखों में छर्रे लगे। ये देखकर हमको शर्म आई, उनको आया कि नहीं मुझे मालूम नहीं। मेरे विद्यार्थी जो गांव-गांव से आए, उनको पैलेट गन का इस्तेमाल करके मार रहे हैं। उनके हाथ-पैर टूटे। इसका जिम्मेदार कौन है। होम मिनिस्टर है। बंद कमरे में आप मेरी बात सुन रहे होंगे, लेकिन छिपकर आप बहुत दिन रह नहीं सकते। एक दिन हम बाहर खींचकर लाएंगे और जनता के सामने दिखाएंगे कि क्या है? इस पर ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की स्पीच में असंसदीय शब्द के इस्तेमाल का दावा करते हुए चेयरमैन से इसे एक्सपंज करने की मांग की। खड़गे ने कहा कि हमने किसी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। हम मतलब जनता। सरकार को 20 जुलाई की घटना के बाद देश की जनता के सामने सफाई रखनी चाहिए थी। उनको इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर नहीं देते, तो प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि 20 जुलाई की घटना के बाद इनको नींद नहीं आ रही थी। रात के 12 बजे वीडियो बनाया। इनको तो मन की बात करने की, पहले की सरकारों को गालियां देने की आदत है। बेचैन हुए, तो वीडियो बनाकर बोले- थैंक्यू फ्रेंड्स। नए नए शब्द बोल रहे थे। लाठीचार्ज करने, आंसू गैस छोड़ने और पैलेट गन का इस्तेमाल करने के लिए आदेश कौन दिया। स्टेटमेंट देना चाहिए था, लेकिन आपने नहीं दिया। देश इन सवालों के जवाब चाहता है। इस्तीफा देने के बाद जिस तरह से संसद में मंत्री का स्वागत हुआ, लगा वह करगिल का युद्ध जीतकर आए हों। यह बताता है कि आप नाकामियों का उत्सव मना रहे हैं। उनको तो पश्चाताप होना चाहिए था। इसकी बजाय मुकुट पहनाया गया। उन्होंने पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 15 दिन पहले पेपर बाजार में आ गया था। क्या आपके पास इंटेलिजेंस नहीं है? आपके पास तो डबल-डबल इंजन हैं। इन सवालों के जवाब आपके पास नहीं हैं। हर बार मोदी की गारंटी फेल होती गई. हर बार बोलते गए कि इस बार नहीं होगा, कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी, देख लूंगा। कहां है कड़ी से कड़ी सजा। कड़ी तो टूट गई, सजा किसको मिली? 2024 के पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को क्लीनचिट मिल गई है। क्या किया उसको? डिमोनेटाइजेशन में विफल हो जाऊंगा तो चौराहे पर लटका देना। क्या किया? जो आदमी किया, आपको मिला है। आपके हाथ में है, क्लीनचिट दे रहे हो। आपका अचीवमेंट जीरो है। दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई समय पर पेश तक नहीं हुई।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) जब बोल रहे थे, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उनसे पूछा कि आपको और कितना समय चाहिए, बता दीजिए। उन्होंने कहा कि समय पूरा हो गया है, इसलिए पूछ रहा हूं। इस पर खड़गे ने कहा कि आप जितना दे दें। इस पर सदन में ठहाके लगे। इसके बाद खड़गे ने अपनी बात जारी रखी और पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा।
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मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई. सरकार क्या कर रही थी। क्या एजेंसियां सो रही थीं? शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है। आपका कहना है कि विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं, लेकिन आप जो सिलेबस बदल रहे हैं, उसमें ये भी आ रहा है- शूद्र के वेद पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाए। वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए। ये आरएसएस सिलेबस है। ऐसे विचारों की निंदा करता हूं। ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। यूपीए सरकार ने सबको समान शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया। राज्यसभा में जोरदार हंगामा हो रहा है।
राज्यसभा में जोरदार हंगामा हो रहा है। मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। ट्रेजरी बेंच से सदस्यों ने माफी मांगने की मांग करते हुए गुंडागर्दी नहीं चलेगी के नारे लगाए। नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है। मनु स्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें। इस पर प्रकाश डालने के लिए सुधांशु त्रिवेदी एक मिनट बोलें। सुधांशु त्रिवेदी ने बोलना शुरू ही किया था कि सभापति ने उनको टोका। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस के साथ ही बाबासाहब डॉक्टर आंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया और कहा कि इसीलिए कह रहा हूं कि ये ऑथेंटिकेट करें। प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह किताब इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं। दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है। 12 साल से इनकी सरकार है। जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए। नड्डा ने कहा कि ऐसे बयानों से अशांति फैलती है। इस पर सभापति ने खड़गे की ओर से मनुस्मृति वाला बयान एक्सपंज करने का ऐलान कर दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने आरोप लगाया कि ओबीसी-एससी और एसटी आगे न आएं, इसके लिए भर्तियां नहीं करते। उन्होंने चार मांगें भी सामने रखीं। मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि इस समस्या को तभी सुलझाया जा सकेगा और लोग स्वीकार करेंगे, जब अमित शाह इस्तीफा देंगे। खड़गे ने मांग की है कि एक फिक्स वार्षिक परीक्षा कैलेंडर होना चाहिए। गड़बड़ियों की जांच हाई पावर स्वतंत्र एजेंसी से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराएं। अमित शाह इस्तीफा दें।