नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में करारी हार झेलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट से गुजर रही है। अभी तक न सिर्फ करीब 60 विधायक ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से अलग हो गए, बल्कि 20 से ज्यादा सांसदों ने भी बगावत का रुख अख्तियार कर लिया है। इस टूट से परेशान ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने विलय का ऑफर दिया था, जिसे वह मानने को तैयार हो गई हैं।
पढ़ें :- जयराम रमेश, बोले- प्रमोद तिवारी ने संसद में कहा था कि 'हम राम के पुजारी हैं और BJP के लोग राम के व्यापारी हैं'
सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी तो टीएमसी (TMC) का कांग्रेस में विलय करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ बैठक में एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी को कांग्रेस राज्यसभा भेजे और वहां नेता विपक्ष का पद भी दे। अभी राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे (Congress chief Mallikarjun Kharge) के पास है।
कांग्रेस-टीएमसी विलय की खबरों पर टिप्पणी से इनकार
कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित विलय की खबरों पर सवाल पूछे जाने पर कुणाल घोष ने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने दिल्ली में हो रही बैठकों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहने की बात कही। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह इंडिया ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक थी, और दोनों पार्टियों के बीच आगे भी बैठकें संभव हैं और हो भी रही हैं। उन्होंने कहा, “हमारे नेता दिल्ली में हैं; पहले कुछ वास्तव में होने दें, और फिर हम देखेंगे। कुणाल घोष के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर इस्तीफों को लेकर कुछ असंतोष है। वहीं कांग्रेस के साथ संभावित विलय के मुद्दे पर फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया जा रहा है।