Mayawati on Ghooskhor Pandat: अभिनेता मनोज बाजपेयी और निर्देशक नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपने टाइटल को लेकर विवादों में घिर गयी है। ब्राह्मण समाज ने इस फिल्म के 50 सेकंड के टीज़र रिलीज़ होने के बाद इसके नाम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे ब्राह्मणों की गरिमा के खिलाफ बताया है। इस बीच, बसपा प्रमुख मायावती ने इस फिल्म पर जातिसूचक होने का आरोप लगाते हुए, इसे तुरंत बैन करने की मांग की है।
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फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का नाम लिए बिना मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, “यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग।”
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों…
— Mayawati (@Mayawati) February 6, 2026
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नाम को लेकर निर्देशक नीरज पांडे ने दी सफाई
निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर एक बयान जारी करते हुए कहा, “हमारी फिल्म एक फिक्शनल कॉप ड्रामा है, और “पंडित” शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक फिक्शनल किरदार के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कामों और फैसलों पर फोकस करती है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती या उसे रिप्रेजेंट नहीं करती। एक फिल्ममेकर के तौर पर, मैं अपना काम बहुत ज़िम्मेदारी के साथ करता हूँ – ऐसी कहानियाँ सुनाने की ज़िम्मेदारी जो सोच-समझकर और सम्मानजनक हों। यह फिल्म भी, मेरे पिछले कामों की तरह, सच्ची नीयत से और सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए बनाई गई है।”
“हम समझते हैं कि फिल्म के टाइटल से कुछ दर्शकों को ठेस पहुँची है, और हम सच में उन भावनाओं को समझते हैं। इन चिंताओं को देखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए और जिस कहानी को हम बताना चाहते थे, उसके संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि अधूरे हिस्सों के आधार पर जज किया जाए। हम जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म शेयर करने का इंतजार कर रहे हैं।”