लखनऊ। यूपी के मेरठ जिले में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शासन-प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस मामले को निंदनीय बताया है। अखिलेश ने रविवार को सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए इंसाफ की मांग की है। अखिलेश ने लिखा है कि मेरठ में एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) की घटना पर शासन-प्रशासन की निष्क्रियता घटना के समान ही घोर निंदनीय है। इंसाफ़ हो!
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मेरठ में एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर शासन-प्रशासन की निष्क्रियता घटना के समान ही घोर निंदनीय है।
इंसाफ़ हो!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 8, 2024
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बता दें कि नाबालिग किशोरी (Minor Girl) के साथ हुए गैंगरेप मामले (Gang Rape) में पुलिस ने मुख्य आरोपी तालिब (Main Accused Talib) को FIR में नामजद किया है। परिजनों का आरोप है कि गैंगरेप के बाद आरोपी पीड़िता को न्यूड छोड़कर भाग निकले थे। वीरान घर में 8 घंटे तक लड़की बेहोश पड़ी रही थी।
ये है पूरा मामला
लोहिया नगर थाना (Lohia Nagar Police Station) क्षेत्र में शनिवार सुबह एक किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। पीड़िता के मकान मालिक का बेटा सुबह करीब 11 बजे उसके पास आया और अपने चाचा का मकान दिखाने की बात कही। किशोरी ने पहले जाने से मना कर दिया, लेकिन बार-बार के आग्रह पर वह उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गई। आरोप है कि मकान मालिक के बेटे ने उसे घर से कुछ दूर ले जाकर एक खाली मकान में बंधक बना लिया। वहां उसने किशोरी के कपड़े उतारकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
इसके बाद दो अन्य लड़के भी वहां आ गए। दोनों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपियों ने किशोरी के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और उसे नग्न (Nude) अवस्था में मकान में छोड़कर फरार हो गए। शोर सुनकर आसपास के लोग वहां पहुंचे और किशोरी को अस्पताल ले गए। बताया जा रहा है कि आरोपी मोहल्ले के ही निवासी हैं। फिलहाल उनकी तलाश जारी है।
अब क्यों नहीं दिख रही सक्रियता?
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अब सवाल ये है कि जहां एक तरफ पुलिस आरोपियों के खिलाफ लगातार एक्शन ले रही है। कहीं बुलडोजर चलवा रही है तो कहीं लूट के मामले में सीधा एनकाउंटर कर दिया जा रहा है। सुल्तानपुर में मंगेश यादव (Mangesh Yadav) का मामला इसका उदाहरण है। तो ऐसे में बच्चियों से रेप के मामले में पुलिस के आंखों पर पट्टी क्यों बंध जा रही है? ऐसे मामलों में खाकी उतनी प्रभावी क्यों नहीं दिख पा रहा ही जितनी बाकी सब मामलों में है?