लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित केडी सिंह बाबू स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल महाकुंभ का आगाज हुआ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इसका उद्धाटना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से भारत के कई सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करके समाज के विकास के लिए एक नई राह तैयार की है। आज लखनऊ का नाम भी उस कड़ी में जुड़ गया है। किसी भी समाज के विकास के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि समाज में खेल और खिलाड़ियों को न केवल महत्व समझा जाये बल्कि उन्हें फलने-फूलने का पूरा अवसर भी दिया जाये।
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उन्होंने आगे कहा, लखनऊ शहर अपनी स्पोर्टिंग कल्चर के लिए केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश विदेश में जाना जाता था। जिन महान हाकी खिलाड़ी केडी सिंह बाबू के नाम से यह स्टेडियम जाना जाता है उन्होंने यहां काफ़ी लम्बा समय बिताया। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद ने भी लखनऊ की खेल संस्कृति को संवारा है। उनके बेटे अशोक कुमार और विख्यात ओलंपियन जमन लाल शर्मा की यह कर्म भूमि रही है। भारत का पहला एस्ट्रो टर्फ भी इसी लखनऊ के स्पोर्ट्स कालेज में अस्सी के दशक में लगाया गया।
आज लखनऊ में सांसद खेल महाकुंभ का शुभारंभ हुआ। प्रधानमंत्री श्री @narendramodi की प्रेरणा से भारत के कई सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करके समाज के विकास के लिए एक नई राह तैयार की है। आज लखनऊ का नाम भी उस कड़ी में जुड़ गया है।
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— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 19, 2025
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राजनाथ सिंह ने आगे कहा, लखनऊ में आजकल इंडियन प्रीमियर लीग यानि आईपीएल के मुकाबले हो रहे हैं, मगर एक समय था जब इसी के डी सिंह बाबू स्टेडियम में शीशमहल ट्रॉफी नाम से एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होता था और टीम इंडिया के बड़े खिलाड़ी लखनऊ में खेलते नजर आते थे। लखनऊ अपनी स्पोर्टिंग कल्चर के लिए कितना विख्यात रहा है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि आजादी के बाद जब पहली बार National Games का आयोजन किया गया तो हमारे-आपके इसी शहर में किया गया। उसके बाद भी समय समय पर यहां नेशनल और इंटरनेशनल स्पोर्टिंग इवेंट्स आयोजित होते रहे हैं।और आज यह सांसद खेल महाकुंभ भी लखनऊ के स्पोर्टिंग कैलेंडर में जुड़ गया है।
उन्होंने आगे कहा, एक समय था जब लोग खेल के महत्व को समझे बिना कहा करते थे कि खेलोगे कूदोगे होगे ख़राब, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब। आज वह सोच बदल चुकी है और खेलों और खिलाड़ियों के प्रति समाज की धारणा बदली है। आज माता-पिता अपने बच्चों को लिएंडर पेस, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रोहित शर्मा, पीवी सिंधु, गुकेश और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ी और एथलीट के रूप में देखना चाहते हैं। जब खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं तो उनका एक ही लक्ष्य होता है- खुद को और टीम को विजयी बनाना। एक खिलाड़ी हमेशा टीम को इंडिविजुअल से ऊपर रखना जानता है। यही भावना आगे चल कर नेशन फर्स्ट के रूप में सामने आती है।
साथ ही कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में एक नई स्पोर्टिंग कल्चर विकसित हुई है। पहले भारत के खिलाड़ी जीतने से अधिक पार्टिसिपेट करने पर ही संतुष्ट हो जाते थे। मगर आज भारत के खिलाड़ी पूरी दुनिया में जहां कहीं भी जाते हैं उन्हें गंभीरता से लिया जाता है। आज खेलो इंडिया के तहत तीन हजार से अधिक खिलाड़ियों को प्रति माह 50 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जो उन्हें प्रशिक्षण, आहार, कोचिंग, किट, आवश्यक उपकरण और अन्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
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