Mpox infection : अफ्रीका के बाहर नए क्षेत्रों में वायरल बीमारी फैलने के कारण मंकीपॉक्सका खतरा मंडरा रहा है। इस वायरस का नया स्ट्रेन (क्लैड-1) अधिक संक्रमणीय माना जाता है और इसकी मृत्यु दर भी अधिक है। भारत ने एमपॉक्स संक्रमण का पता लगाने के लिए स्वदेशी आरटी-पीसीआर किट विकसित की है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा मान्यता प्राप्त यह किट 40 मिनट में परिणाम बताती है। यह आरटी-पीसीआर किट एक मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक टेस्ट है जो वायरल जीनोम में वायरस के क्लैड। और क्लैड ।। वैरिएंट दोनों को टारगेट करता है।
पढ़ें :- जनता की आवाज दबाने के लिए पीएम मोदी हर वो रास्ता बंद कर देना चाहते हैं जहां सवाल पूछा जा सके: सुप्रिया श्रीनेत
जानकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश सरकार की एक रिसर्च बॉडी मेडटेक जोन द्वारा इस आरटी-पीसीआर किट को बनाया गया है। ट्रांसएशिया डायग्नोस्टिक के साथ मिलकर इस स्वदेशी आरटी पीसीआर किट को बनाया गया है। इस किट के जरिए मंकीपॉक्स वायरस से संदिग्ध व्यक्ति की जांच आसानी से की जा सकेगी। इस किट को ErbaMDX ब्रैंड का नाम देकर लॉन्च किया गया है। हालांकि, किट की कीमत अभी निर्धारित नहीं की गई है।
भारत में अभी तक एमपॉक्स का एक भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन पड़ोसी देशों में इस वायरस की पुष्टि होने के बाद से भारत में भी एमपॉक्स से निपटने के लिए तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर तैयारियां की जा रही हैं। कई राज्यों में तो एमपॉक्स से बचने के लिए आइसोलेशन वार्ड भी बनाए जा चुके हैं।