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पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी को लंदन हाईकोर्ट से बड़ा झटका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली: लंदन हाई कोर्ट ने नीरव मोदी (Nirav Modi) की प्रत्यर्पण पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जिससे उनके भारत प्रत्यर्पण का मार्ग सुगम हो गया है। 13,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक नीरव मोदी की 1,052 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति नीलाम कर बैंकों को लौटा दी है।

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करोड़ों रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले (Punjab National Bank scam) के मुख्य आरोपी और भगोड़े ‘हीरा कारोबारी’ नीरव मोदी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। लंदन स्थित हाई कोर्ट ने नीरव मोदी (Nirav Modi)  की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण के मामले को दोबारा खोलने की मांग की थी।

नीरव मोदी (Nirav Modi)  ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसके मामले पर फिर से विचार किया जाए, जिसे लंदन हाई कोर्ट की ‘किंग्स बेंच डिवीजन’ (King’s Bench Division) ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की मांग की थी। जजों ने अपने 18 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि मामले को दोबारा खोलने के लिए कोई ‘असाधारण परिस्थितियां’ नहीं मिलीं।

ब्रिटिश अदालत ने भारत सरकार के तरफ से दिए गए लिखित आश्वासनों को “विशिष्ट और विश्वसनीय” माना है। भारत ने आश्वासन दिया है कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ नहीं की जाएगी, बल्कि उसे सीधे जेल भेजा जाएगा और मुकदमे का सामना करना होगा। नीरव मोदी की कानूनी टीम ने संजय भंडारी मामले (मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी से जुड़ा है) का उदाहरण देकर सुरक्षा और मानवाधिकारों की दुहाई दी थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त माना।

भारत वापसी की तैयारी

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इस फैसले के बाद नीरव मोदी (Nirav Modi)  को भारत लाए जाने की जांच एजेंसियों की कानूनी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। CBI और ED लंबे समय से उसे वापस लाने की कोशिश कर रही हैं। बता दें कि नीरव मोदी (Nirav Modi)  पर करीब 13,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग अवैध गतिविधियों – जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी, भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी से कमाए गए “काले धन” को वैध या “सफ़ेद” दिखने का आरोप है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प लगभग पूरी तरह से खत्म होते नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट: सुशील कुमार साह

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