नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (Narmadapuram) जिले के इटारसी के मुस्लिम युवक आरिफ खान चिश्ती (Arif Khan Chishti) ने मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) जी को किडनी दान करने की पेशकश कर दी है। इस पेशकश के बाद लोगों ने कहा कि ये सिर्फ हिंदुस्तान में ही हो सकता है।
पढ़ें :- T20 WC 2026: टी20 विश्व कप से पहले पाकिस्तान ने शुरू किया ड्रामा, भारत के साथ नहीं खेलेगा मैच
आरिफ खान चिश्ती (Arif Khan Chishti) ने कहा कि मै रहूं या न रहूं मुझे इसकी चिंता नहीं है, लेकिन जो देश को जोड़कर रखने की बात करता है उनका जिंदा रहना अति आवश्यक है। आरिफ खान चिश्ती ने कहा कि प्रेमानंद महाराज जी के प्रवचन सिर्फ हिन्दू मुस्लिम को नहीं बल्कि पूरे देश को जोड़ने का काम करते हैं, आज के इस माहौल में आपका रहना बहुत आवश्यक है, मेरा निवेदन है मेरे इस तुच्छ से उपहार को स्वीकार कर करने की कृपा करें। बता दें कि आरिफ खान चिश्ती ने नर्मदापुरम कलेक्टर के माध्यम से प्रेमानंद जी को पत्र लिखा है, ईमेल भी किया है और व्हाट्सअप पर मैसेज भेज कर भी निवेदन किया है कि मेरी किडनी प्रेमानंद जी महाराज को लगा दी जाए। चिश्ती ने अपना पत्र श्री हित राधा केली कुंज आश्रम, वृंदावन के पते पर भेजा है।
इटारसी के आरिफ खान चिश्ती (Arif Khan Chishti) ने किडनी डोनेट (Kidney Donate) के लिए लिखे पत्र को संत प्रेमानंद महाराज ग्रुप को मेल और वॉट्सएप नंबर पर भेजा है। चिट्ठी में आरिफ ने प्रेमानंद महाराज को लेकर अपने विचार भी व्यक्त किए हैं। उन्हें पत्र में लिखा है महाराज जी, मैं आपसे काफी प्रभावित हूं। आपके वीडियो को देखता हूं। आपके आचरण और व्यवहार से प्रसन्न हूं। आप हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं। समाज में प्रेम शांति का संदेश देते हैं। मीडिया के माध्यम से ही मुझे जानकारी मिली कि आपकी दोनों किडनियां फेल हैं। आपके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हूं। नफरती माहौल में आप जैसे संतों का मानव संसार में रहना जरूरी है। इसलिए ऐसे में अपनी स्वेच्छा से आपको अपनी एक किडनी डोनेट करना चाहता हूं। चिश्ती के अनुसार, देश में भाईचारे का संदेश देने के लिए उन्होंने यह पहल की है।
चिश्ती ने कहा कि वे भविष्य में वृंदावन जाकर प्रेमानंद जी के दर्शन करना चाहते हैं। अगर प्रेमानंद जी अनुमति देते हैं, तो वे उन्हें अपनी किडनी दान करने के लिए तैयार हैं। चिश्ती ने बताया कि वे एक कंसल्टेंसी फर्म चलाते हैं और एक NGO के माध्यम से बेसहारा लाशों के कफन दफन का काम भी करते हैं।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर मेहनाज खान ने किडनी दान करने की है नेक पहल
पढ़ें :- Budget 2026: जानिए बजट में क्या-क्या हुआ सस्ता? कैंसर, शुगर जैसी दवाइयों पर मिलेगी बड़ी राहत
नरसिंहपुर जिले मानवता और धार्मिक सद्भाव का एक अद्भुत उदाहरण सामने आया है, जहां एक मुस्लिम बेटी ने गंभीर रूप से बीमार संत प्रेमानंद महाराज को अपनी एक किडनी दान करने की पेशकश की है। यह घटना मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से जुड़ी है, जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर मेहनाज खान ने यह नेक पहल की है।
सोशल मीडिया के माध्यम से जब मेहनाज खान को पता चला कि संत प्रेमानंद महाराज किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया। मेहनाज ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज न केवल एक धर्म विशेष के संत हैं बल्कि वे पूरे समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा है और मैं उनके जीवन की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकती हूं।
इस नेक काम की शुरुआत मेहनाज ने अपनी आस्था के साथ की
इस नेक काम की शुरुआत मेहनाज ने अपनी आस्था के साथ की। बीते शुक्रवार की नमाज अदा करने के बाद उन्होंने विशेष दुआ की और संत प्रेमानंद महाराज के लिए लंबी आयु और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता की सेवा करना सिखाता है, और ईश्वर की प्रार्थना हर किसी के लिए की जा सकती है चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो? सामाजिक सद्भाव का यह संदेश ऐसे समय में आया है। जब समाज में अक्सर धार्मिक विभाजन की बातें होती रहती है। मेहनाज खान का यह कदम यह साबित करता है कि प्रेम, भाईचारा और मानवता सभी धर्मों की सीमाओं से ऊपर है. उनका यह कदम न केवल संत प्रेमानंद महाराज के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकता है, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
प्रेम और करुणा के ऐसे कार्य किसी भी धर्म से परे होते है और यही हमारे देश की एकता की पहचान है
पढ़ें :- Epstein Files : यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन मामले में ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार पर गवाही देने का बढ़ा दबाव, जानिए क्यों छिड़ा है विवाद?
यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि जब हम एक-दूसरे के दुख में साथ खड़े होते है, तो समाज और भी मजबूत होता है। प्रेम और करुणा के ऐसे कार्य किसी भी धर्म से परे होते है और यही सच्चे मायनों में हमारे देश की एकता की पहचान है।