अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) चढ़ावा चोरी विवाद का श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा असर पड़ा है। यही वजह है कि पहले दानपेटियों से रोजाना 8 से 12 लाख रुपए तक चढ़ावा निकलता था। वो अब घटकर 1 लाख रुपए के नीचे पहुंच गया है। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई है। श्रद्धालु कह रहे है कि पैसों की चोरी नहीं हुई है, आस्था की चोरी हुई है।
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बता दें कि पहले मंदिर के दानपेटी में प्रतिदिन 8 लाख से 12 लाख रुपये तक जमा होते थे। मंदिर के कर्मचारियों के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद से दान की राशि घटकर 1 लाख रुपये प्रतिदिन से भी कम हो गई है। हालांकि, मंदिर अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि इन आरोपों ने दान प्रणाली में उनके विश्वास को हिला दिया है और अब वे नकद दान के बजाय ऑनलाइन दान को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसआईटी (SIT) की जांच के बाद, ट्रस्ट ने निगरानी बढ़ा दी है और दान की गिनती और बैंकों में जमा करने की प्रक्रिया को मजबूत किया है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान राम में उनकी आस्था अभी भी दृढ़ है, लेकिन आरोपों ने दान के प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंदिर में श्रद्धालु दुनिया भर से राम मंदिर आते रहेंगे, लेकिन कथित चोरी की घटना से कई लोग दुखी हैं। उनका मानना है कि ऑनलाइन दान करना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
दिल्ली से अपने परिवार के साथ अयोध्या आए एक श्रद्धालु का कहना है कि इस विवाद से गलत संदेश गया है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को दान देना जारी रखना चाहिए, लेकिन धन का उपयोग पीने के पानी जैसी सुविधाओं और मंदिर के आसपास के गरीबों की सहायता के लिए भी किया जाना चाहिए।
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यह चिंता केवल भक्तों तक ही सीमित नहीं है। हनुमानगढ़ी के महंत महेश योगी (Mahant Mahesh Yogi) का कहना है कि इन आरोपों से राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं और दान और कीमती वस्तुओं के उचित उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली की एक अन्य श्रद्धालु का कहना है कि आस्था अप्रभावित रहती है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को अंततः अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा।
समय के साथ जानें दान देने का तरीका कैसे बदला?
2020-2024: प्रतिदिन औसत दान राशि 2.43 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 5 फरवरी, 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के गठन के बाद, एक बड़े पैमाने पर दान अभियान शुरू हुआ। ट्रस्ट के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2021 तक दान राशि 1,511 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी। 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह तक, ऑनलाइन योगदान, दान पेटी और हर घर समर्पण अभियान सहित सभी स्रोतों से प्राप्त दान राशि लगभग 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
इसका मतलब है कि औसतन सालाना लगभग 875 करोड़ रुपये, मासिक 72.9 करोड़ रुपये और प्रतिदिन लगभग 2.43 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
22 अगस्त, 2024 को हुई ट्रस्ट की बैठक में अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं ने 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना भी दान किया था। निर्माण खर्च के बाद भी ट्रस्ट के खातों में लगभग 2,600 करोड़ रुपये शेष थे।
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2024-2025: दैनिक चढ़ावा घटकर लगभग 36 रुपये लाख रह गया
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई। पहले 11 दिनों में ही दान पेटियों में 11 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्रित हुई, जबकि पहले महीने में कुल दान 25 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
हालांकि, समय के साथ गति धीमी हो गई।
जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच मंदिर को दान के रूप में 153 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह लगभग 10.9 करोड़ रुपये प्रति माह या 36.4 लाख रुपये प्रति दिन के हिसाब से था। इसी अवधि के दौरान, ट्रस्ट ने अपनी जमा राशि पर ब्याज के रूप में 173 करोड़ रुपये अर्जित किए।
2025-2026: दान पेटियों से प्रतिदिन 16.6 रुपये लाख का योगदान प्राप्त होगा
21 मार्च, 2026 को ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत खातों से पता चला कि अप्रैल 2025 और फरवरी 2026 के बीच मंदिर को दान के रूप में 82 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
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औसत आय प्रति माह 7.45 करोड़ रुपये और प्रतिदिन लगभग 24 लाख रुपये रही
कुल राशि में से 54.79 करोड़ रुपये दान पेटियों के माध्यम से, 18.88 करोड़ रुपये काउंटरों के माध्यम से, 8.33 करोड़ रुपये ऑनलाइन और 78 लाख रुपये विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं से प्राप्त हुए। अकेले दान पेटियों से ही प्रतिदिन लगभग 16.6 लाख रुपये का योगदान प्राप्त हुआ।
ट्रस्ट ने एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा राशि से ब्याज के रूप में 138 करोड़ रुपये भी अर्जित किए, जिससे इस अवधि के दौरान कुल आय 221 करोड़ रुपये हो गई। सूत्रों का दावा है कि दान चोरी मामले में बाद में आरोपी बनाए गए कई लोगों को इसी चरण के दौरान भर्ती किया गया था।
15-19 जून, 2026: दैनिक संग्रह 1 लाख रुपये से नीचे गिरा
दान की गिनती में शामिल मंदिर के कर्मचारियों का कहना है कि इस विवाद का तत्काल प्रभाव पड़ा है। उनके अनुसार, दान पेटियों से जो सामान्य दिनों में 8-12 लाख रुपये प्राप्त होते थे, अब उनसे प्रतिदिन 1 लाख रुपये से भी कम राशि प्राप्त हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून से 19 जून के बीच दैनिक संग्रह 85,000 रुपये से 95,000 रुपये के बीच रहा।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट केवल दान में हुई है और इससे श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा है। विवाद 7 जून को सामने आया, जब लगभग 1.21 लाख श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आए। तब से लेकर अब तक लगभग इतनी ही संख्या में श्रद्धालु आते रहे हैं।
दान की गिनती प्रणाली को और सख्त किया गया
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सूत्रों का कहना है कि विवाद के बाद ट्रस्ट ने सतर्कता बढ़ा दी है। मंदिर परिसर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित यात्री सुविधा केंद्र के तहखाने में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की देखरेख में चढ़ावे की गिनती जारी है। अयोध्या के सेवानिवृत्त बैंकर सुभाष श्रीवास्तव लेखा-जोखा संभालते हैं। मंदिर में 35 दान पेटियां हैं, जिन्हें अब दिन में दो बार खोला जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान ट्रस्ट और बैंकों के चार प्रतिनिधि उपस्थित रहते हैं। मतगणना दो चरणों में की जाती है। सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक। प्रत्येक शिफ्ट में स्थायी बैंक कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मचारियों सहित लगभग 20 लोग काम करते हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों को ट्रस्ट सदस्यों की सिफारिश पर नियुक्त किया गया था। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने कई लोगों से पूछताछ की है।
इस विवाद ने राम मंदिर निधि से जुड़े पहले के आरोपों की यादें भी ताजा कर दी हैं, जिनमें अत्यधिक कीमत पर भूमि खरीद के दावे और दान के उपयोग पर सवाल शामिल हैं।