Pitru Paksha 2024 : पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है। पितृपक्ष के समय मृत पूर्वजों की तिथि के अनुसार उनका पिंडदान किया जाता है। हिंदू पंचांग (Panchang) के अनुसार इस साल 17 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है,और 2 अक्टूबर तक चलेगा।
पढ़ें :- Aaj Ka Rashifal 20 May: इन राशियों की आज चमकेगी किस्मत, व्यापार और नौकरी में मिलेगा लाभ
पिंडदान
पितरों को तृप्त करने के लिए काले तिल, अक्षत मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहा जाता है। तर्पण में काला तिल और कुश का बहुत महत्व होता है। श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्व होता है। मान्यता है कि तर्पण के दौरान काले तिल से पिंडदान करने से मृतक को बैकुंठ की प्राप्ति होती है।
पिंडदान की विधि (Pind Daan Vidhi)
पिंडदान के लिए सुबह 11.30 से दोपहर 12.30 तक का समय अच्छा रहता है. इसके लिए जौ के आटे या खोये से पिंड बनाकर पके हुए चावल, दूध, शक्कर, शहद और घी को मिलाकर पिंडों का निर्माण करें. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके फूल, चंदन, मिठाई, फल, अगरबत्ती, तिल, जौ और दही से पिंड का पूजन करें।
गरुण पुराण पिंडदान
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद 10 तक पिंडदान अवश्य करना चाहिए। पिंडदान से ही आत्मा को चलने की शक्ति प्राप्त होती है। पिंडदान मृतक के अगले जन्म के लिए जरूरी है। यदि पिंडदान नहीं किया जाता है, तो, मान्यता के अनुसार, इन पूर्वजों की आत्माएं भटकती है। और उन्हें कभी शांति नहीं मिलती है या उनके जीवन के बाद की यात्रा में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता है।