नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस समय हालात चिंताजनक हैं, लेकिन भारत सरकार पूरी तैयारी के साथ स्थिति को संभाल रही है ताकि देश में किसी तरह का संकट न पैदा हो। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पहले जहां देश 27 देशों से तेल आयात करता था, अब इसे बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया गया है, जिससे सप्लाई बाधित न हो। पीएम मोदी ने कहा कि यह संकट तीन हफ्तों से अधिक समय से जारी है और पूरी दुनिया इसके शांतिपूर्ण समाधान की अपील कर रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से लौटे हजार लोग और 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं।
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PM मोदी के संबोधन की बड़ी बातें:
तेल-गैस और एनर्जी पर:
सरकार 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के रिजर्व पर काम कर रही है। अलग-अलग देशों के सप्लायर्स से लगातार संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहां से संभव हो सप्लाई जारी रहे। तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़े जहाज सुरक्षित भारत पहुंचें, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जा रहा है।
अन्न और खेती पर असर:
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पर्याप्त अन्न भंडार मौजूद है और आपात स्थिति से निपटने के पूरे इंतजाम हैं। किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है और 6 नए यूरिया प्लांट स्थापित किए गए हैं। साथ ही “मेड इन इंडिया” नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि संकट का असर खेती पर न पड़े।
बिजली सप्लाई पर:
गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली की बढ़ती मांग को लेकर सरकार सतर्क है। सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक मौजूद है और उत्पादन से लेकर सप्लाई तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
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एनर्जी सेक्टर की रणनीति:
सरकार ने एक विशेष ग्रुप बनाया है, जो रोजाना बैठक कर आयात-निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर इस संकट का असर कम हो।
जंग पर भारत का रुख:
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने कमर्शियल जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद से एकजुट संदेश जाना जरूरी है, ताकि वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत और संतुलित भूमिका सामने आ सके।