खूंटी, झारखंड। खूंटी जिला स्वास्थ्य विभाग ने झारखंड को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत अब जिले के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले टीबी मरीजों के बलगम (Sputum) के सैंपल डाक विभाग (Department of Posts) के जरिए बेहतर जांच के लिए रांची भेजे जाएंगे।
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इस नई व्यवस्था से नमूनों को समय पर जांच केंद्र तक पहुंचाई जाएगी, साथ ही इससे मरीजों के सटीक और त्वरित इलाज का रास्ता भी साफ होगा। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि अब, खूंटी जिला यक्ष्मा केंद्र (Tuberculosis Centre) से इस सेवा की औपचारिक शुरुआत (Formal launch) कर दी गई है। पहले चरण में दो टीबी पॉजिटिव मरीजों के बलगम के नमूनों को डाक विभाग के माध्यम से रांची स्थित Intermediate Reference Laboratory (IRL) इटकी भेजा गया है। अब से जिले के सभी चिन्हित मरीजों के सैंपल इसी नियमित व्यवस्था के तहत भेजे जाएंगे ताकि उनकी दवा के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity to the drug) की सटीक जांच हो सके।
संक्रमण रोकने के लिए फाइव-लेयर पैकेजिंग
मरीजों के सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है ताकि रास्ते में खराब न हों और इससे किसी भी प्रकार का संक्रमण न फैल सके। स्वास्थ्य विभाग इन नमूनों को भेजने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पांच स्तरीय सुरक्षित पैकेजिंग का उपयोग कर रहा है। डाक विभाग की त्वरित लॉजिस्टिक्स सेवा के कारण ये सैंपल बिना किसी देरी के सीधे लैब पहुंच जाएंगे।
समय की बचत और मरीजों को बड़ी राहत
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इस नई पहल के कई दूरगामी फायदे देखने को मिलेंगे क्योंकि पहले कूरियर या अन्य वैकल्पिक माध्यमों के इंतजार में सैंपल भेजने में देरी होती थी। अब डाक विभाग की मदद से रिपोर्ट जल्द आ सकेगी। जांच रिपोर्ट समय पर मिलने से डॉक्टरों को मरीजों की सही स्थिति का पता चलेगा और उनकी दवाइयां तुरंत शुरू कर उनका इलाज किया जा सकेगा। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों को अपनी बेहतर जांच के लिए उन्हें खुद रांची जाने या चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी।
2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य
यह पहल राज्य सरकार के एक बड़े अभियान का हिस्सा है जिसमें झारखंड को वर्ष 2029 तक पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए पूरे राज्य में Special TB Screening Campaign चलाए जा रहे हैं, जिसमें पोर्टेबल एक्स-रे और एआई (AI) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसके साथ ही वहां की सरकार टीबी मरीजों को बेहतर पोषण (Better nutrition) के लिए प्रति महीने ₹1000 की निक्षय पोषण सहायता राशि (Nikshay Poshan Support Amount) भी प्रदान कर रही है।