Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. Hindi Journalism Day: 200 साल के गौरवशाली सफर की ओर बढ़ते कदम, ‘उदन्त मार्तण्ड’ से हुई थी शुरुआत

Hindi Journalism Day: 200 साल के गौरवशाली सफर की ओर बढ़ते कदम, ‘उदन्त मार्तण्ड’ से हुई थी शुरुआत

By Sushil Sah 
Updated Date

कोलकत्ता: आज देशभर में ‘हिंदी पत्रकारिता दिवस’ बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है। ठीक 200 साल पहले, यानी 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल (जो कानपुर के रहनेवाले थे) ने कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) से भारत के पहले हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र “उदन्त मार्तण्ड” का प्रकाशन शुरू किया था।

पढ़ें :- NRHM Scam : पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और दो सेवानिवृत्त सीएमओ समेत छह के खिलाफ FIR , बिना काम किए हड़पे करोड़ों रूपये

सत्य और साहस का प्रतीक

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘उदन्त मार्तण्ड’  का प्रकाशन भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में शुरू हुए इस अखबार ने समाज में जागरूकता फैलाने और नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने में अहम भूमिका निभाई। यह दिन सत्य, साहस और जनकल्याण के लिए काम करने वाले देश के तमाम हिंदी पत्रकारों के अटूट योगदान को समर्पित है। ब्रज और अवधी के मिश्रण वाली खड़ी बोली में छपने वाले इस अखबार का अर्थ ‘उगता हुआ सूर्य’ था, लेकिन डाक दरों में रियायत न मिलने और गंभीर आर्थिक तंगी के कारण प्रकाशन के करीब डेढ़ साल बाद ही 4 दिसंबर 1827 को इसे बंद करना पड़ा था। कुल 79 अंकों के सीमित सफर के बावजूद इस समाचार पत्र ने भारतीय समाज को जागृत करने और हिंदी पत्रकारिता की मजबूत नींव रखने में एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी भूमिका निभाई थी। उस समय कलकत्ता में अंग्रेजी, बंगाली और फारसी भाषा में कई अखबार निकलते थे, लेकिन हिंदी भाषी लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कोई अखबार नहीं था।

पंडित युगल किशोर शुक्ल ने इस चुनौती को समझा और हिंदी के पहले समाचार पत्र के संपादक बनकर एक ऐतिहासिक शुरुआत की। उनके इस अतुलनीय योगदान को याद रखने के लिए, भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली के पुस्तकालय का नाम उनकी स्मृति में ‘पं. युगल किशोर शुक्ल पुस्तकालय’ रखा गया है। हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में उनका नाम सदैव स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। ब्रिटिश काल में देशवासियों और हिंदुस्तानियों के हक के लिए आवाज उठाना इसका मुख्य लक्ष्य था। उदंत मार्तंड’ बंद होने के कई सालों बाद, उन्होंने हार नहीं मानी और 1850 में ‘साम्यदन्त मार्तण्ड’ नाम से एक और समाचार पत्र निकालने का प्रयास किया था।

समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव

पढ़ें :- Hair Oiling Myths: मेडिकल साइंस का बड़ा दावा, अत्यधिक ऑयलिंग से बढ़ता है संक्रमण का खतरा

जानकारों का मानना है कि इस पहले समाचार पत्र ने भारत में पत्रकारिता के एक नए युग का आरंभ किया। इसके बाद से ही देश में हिंदी समाचार पत्रों का महत्व लगातार बढ़ता गया। आज डिजिटल और प्रिंट के इस आधुनिक दौर में भी हिंदी पत्रकारिता आम जनता की आवाज बुलंद करने और उन तक सटीक जानकारी पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम बनी हुई है। आज इस खास मौके पर देशभर के मीडिया संस्थानों और पत्रकार संघों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहां पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और इसकी सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा हो रही है।

Advertisement