बारामती : महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट (Baramati Assembly Seat) से दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Late Former Deputy Chief Minister Ajit Pawar) की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) का निर्विरोध विधायक बनना अब लगभग तय है। इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) के अलावा कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं बचा है, जिससे उनका निर्विरोध चुनाव जीतना तय माना जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर आकाश मोरे को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन नामांकन पत्र वापस लेने की आखिरी तारीख से सिर्फ एक घंटे पहले आकाश मोरे (Akash More) ने अपना नामांकन वापस ले लिया।इसके साथ ही बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) अकेली उम्मीदवार रह गईं।
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बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Congress State President Harshvardhan Sapkal) को फोन कर विशेष अपील की थी। फडणवीस ने कहा था कि दिवंगत अजित पवार (Ajit Pawar) के सम्मान में कांग्रेस सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) के खिलाफ अपना उम्मीदवार वापस ले लें। उन्होंने यह भी कहा कि बारामती पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ है, इसलिए यहां निर्विरोध चुनाव कराने में सभी राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए। शरद पवार ने भी कांग्रेस से अपील की थी कि वह बारामती सीट पर उम्मीदवार न उतारे। उन्होंने कहा था कि अजित पवार के निधन के बाद यह सीट उनके परिवार को सम्मान के रूप में दी जा सकती है।
बारामती सीट अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के कारण खाली हुई थी। अजित पवार लंबे समय तक इस सीट से विधायक रहे थे और बारामती को पवार परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को महायुती गठबंधन की उम्मीदवार बनाया गया है। आकाश मोरे (Akash More) के नाम वापस लेने के फैसले के बाद अब सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) बिना किसी मुकाबले के विधानसभा पहुंच जाएंगी। यहां 23 अप्रैल को उपचुनाव के तहत वोटिंग थी, लेकिन अब वोटिंग की जरूरत ही पड़ेगी।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा निर्विरोध जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां महायुती गठबंधन सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को बिना चुनाव के जीत दिलाने की कोशिश में सफल रहा, वहीं कांग्रेस ने आखिरी समय तक मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन अंत में उम्मीदवार वापस ले लिया। अजित पवार के निधन के बाद यह सीट उनके परिवार के लिए भावनात्मक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।