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CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव LS अध्यक्ष और RS सभापति ने किया खारिज, कांग्रेस बोली- सरकार चुनाव आयोग के जरिये लोकतंत्र का गला घोंट रही

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी की ओर से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद के सदनों में खारिज हो गया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष की नोटिस खारिज कर दी। जिसके बाद देश की सियासत गरमाने लगी है। 

By Abhimanyu 
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Impeachment Motion Against the CEC : पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी की ओर से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद के सदनों में खारिज हो गया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष की नोटिस खारिज कर दी। जिसके बाद देश की सियासत गरमाने लगी है।

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राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष द्वारा CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज किए जाने पर, कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, “नोटिस को खारिज करने का कोई वैध कारण नहीं था। सरकार को चुनाव आयोग का समर्थन करना होता है, और इसी आधार पर राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष, दोनों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसका साफ मतलब है कि नरेंद्र मोदी की सरकार चुनाव आयोग के ज़रिए लोकतंत्र का गला घोंट रही है और अपने गलत कामों को छिपाने की कोशिश कर रही है।”

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, “मौजूदा चुनाव आयोग को एक काम सौंपा गया है, और वह है BJP के पक्ष में काम करना। ज्ञानेश कुमार को यह काम इसलिए सौंपा गया है, क्योंकि BJP लोकतांत्रिक तरीकों से बंगाल में जीत हासिल नहीं कर सकती। इसलिए, अगर हमने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात की है, तो सरकार निश्चित रूप से उन्हें बचाने की कोशिश करेगी, जैसा कि वह हमेशा से ऐसे लोगों को बचाती आई है, जो लोकतंत्र और जनभावना को कमजोर करते हैं। अब हम देखेंगे कि बंगाल में क्या होता है। जो लोग BJP या सरकार के पक्ष में काम कर रहे हैं, चुनाव आयोग उसमें कितना सफल हो पाता है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि बंगाल की जनता उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी।”

चुनाव आयुक्त पर पक्षपात करने का आरोप

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को महाभियोग का नोटिस सौंपा था, जिसमें उन पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैये, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालने और बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करना सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने अलग-अलग आदेशों में संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत ज्ञानेश कुमार को उनके हटाने की मांग वाली नोटिस को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।

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इस मामले में लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल की ओर से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है- “भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत प्रस्ताव के नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय, जिसे अन्य प्रासंगिक संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाए; यह नोटिस मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का अनुरोध करता है।
सदस्यों को सूचित किया जाता है कि 12 मार्च, 2026 को दिनांकित एक प्रस्ताव का नोटिस, जिस पर लोकसभा के 130 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं, भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत—जिसे उसी के अनुच्छेद 124(4), ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023’ की धारा 11(2) और ‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968′ के साथ पढ़ा जाए—माननीय लोकसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत किया गया था; इस नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई थी।”

इसमें आगे कहा गया है- “प्रस्ताव के नोटिस पर समुचित विचार करने तथा उसमें निहित सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों का सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष मूल्यांकन करने के पश्चात्, माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने—’न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968’ की धारा 3 के तहत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए—उक्त प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।”

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