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वैभव सूर्यवंशी, बोले-जब विराट कोहली ने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मुझे लगा किसी सपने की तरह, मैं वर्ल्ड क्रिकेट को करूंगा डॉमिनेट

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के टीम इंडिया (Team India) हिस्सा बनने के बाद राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals)  ने सोशल मीडिया पर उनका एक इंटरव्यू शेयर किया है। इसमें वैभव ने कहा कि मुझे सिर्फ अच्छा नहीं खेलना है, बल्कि अगले 10-20 साल तक डोमिनेट करना है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के टीम इंडिया (Team India) हिस्सा बनने के बाद राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals)  ने सोशल मीडिया पर उनका एक इंटरव्यू शेयर किया है। इसमें वैभव ने कहा कि मुझे सिर्फ अच्छा नहीं खेलना है, बल्कि अगले 10-20 साल तक डोमिनेट करना है।

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वैभव ने कहा कि मेरा सपना क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेलना है। राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के टीम मैनेजर रोमी भिंडर के साथ इंटरव्यू में उन्होंने IPL 2026 के फाइनल का भी जिक्र किया और कहा कि जब विराट कोहली ने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मुझे ये किसी सपने की तरह लगा। 15 साल वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi)  भारतीय क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्हें जून-जुलाई में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज के साथ सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स टीम के लिए चुना गया है।

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राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals)  की ओर से शेयर किए गए एक वीडियो में रोमी भिंडर ने वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi)  से पूछा कि IPL 2026 की जर्नी को किस तरह देखते हैं? इस पर वैभव ने कहा कि IPL का टूर्नामेंट दो से ढाई महीने तक चलता है। इसमें मेंटली और फिजिकली मजबूत रहना पड़ता है। हर मैच के बाद हम टीम में बैठकर चर्चा करते थे कि क्या कमी रह गई। कौन-सी गलती हुई और उसे दोबारा कैसे नहीं दोहराना है। इससे काफी फायदा हुआ, क्योंकि आपस में बातचीत करने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

ऑरेंज कैप छूने का शौक था, आज पहन रहा हूं

रोमी भिंडर ने एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि वैभव जब पहली बार आपको ऑरेंज कैप मिली थी, तब आप हनुमान मंदिर गए थे और कहा था कि ऑरेंज कैप के बारे में नहीं सोचेंगे, वरना नजर लग जाएगी। इस पर वैभव ने मुस्कुराते हुए कहा कि जब मैं IPL में किसी खिलाड़ी के सिर पर ऑरेंज कैप देखता था, तो सोचता था कि एक बार इसे छूकर देखूं। आज खुद इसे पहन रहा हूं, तो बहुत अच्छा लग रहा है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान मैंने इसके बारे में नहीं सोचा, क्योंकि मुझे लगता है कि ज्यादा सोचने से नजर लग जाती है।

फाइनल खेलता तो और ज्यादा अच्छा लगता

क्या आप IPL 2026 के अपने परफॉर्मेंस से संतुष्ट हैं? के जवाब पर वैभव ने कहा कि अगर आखिरी मैच में हम जल्दी विकेट नहीं गंवाते, तो शायद IPL 2026 का फाइनल देख नहीं रहे होते, बल्कि खेलते। अगर टीम ट्रॉफी जीतती और उसके बाद मुझे ये अवॉर्ड्स मिलते, तो ज्यादा खुशी होती। उन्होंने आगे कहा कि लोग पूछते हैं कि दूसरी ट्रॉफी कब आएगी। मुझे उम्मीद है कि सिर्फ दूसरी ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि आने वाले सालों में तीसरी, चौथी और पांचवीं ट्रॉफी भी जीतेंगे।

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मुझे रेड बॉल खेलना है पसंद 

सुनील गावस्कर से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi)  ने कहा कि कई लोगों ने मुझसे पूछा था कि मैं भविष्य में रेड-बॉल क्रिकेट खेलना चाहता हूं या नहीं। मैंने इसी सवाल का जवाब सुनील गावस्कर सर को भी दिया था कि मुझे रेड बॉल क्रिकेट खेलना पसंद है। उन्होंने कहा कि रेड-बॉल क्रिकेट के लिए लगातार प्रैक्टिस भी कर रहा हूं। अपने राज्य के लिए भी मैंने काफी रेड-बॉल मैच खेले हैं। रेड-बॉल और वनडे क्रिकेट में टीम की जरूरत के अनुसार, जिस तरह की बल्लेबाजी करनी होगी, मैं अपने खेल को उसी हिसाब से ढालूंगा। वैभव ने आगे कहा कि मेरा सपना भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेलना है। बाकी सब भगवान पर छोड़ दिया है।

राजस्थान रॉयल्स में सिलेक्ट होने के बाद भगवान को हजार बार थैंक्यू बोला

वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि जब IPL ऑक्शन में मेरे लिए बोली लगी थी, तब मेरे मन में यह सवाल आया था कि मुझ पर सिर्फ दो टीमों ने ही बोली क्यों लगाई। मुझे लगता था कि मैं अच्छा खेलता हूं और ट्रायल्स में भी मेरा प्रदर्शन अच्छा था, इसलिए बाकी टीमों को भी मुझमें रुचि दिखानी चाहिए थी।

हालांकि, उन्होंने राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals)  के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल से राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals)  का हिस्सा रहने के बाद मैं भगवान को कम-से-कम हजार बार धन्यवाद दे चुका हूं कि उन्होंने मुझे इस टीम तक पहुंचाया। वैभव ने आगे कहा,कि यहां सपोर्ट स्टाफ से लेकर ट्रेनर तक सभी लोग बेहद सपोर्टिव हैं। पूरी टीम एक परिवार की तरह है। सीनियर खिलाड़ी लगातार मेरा मार्गदर्शन करते हैं और मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है।

खेलते समय दिमाग को मजबूत रखना बेहद जरूरी

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मैच से पहले की तैयारी और विजुअलाइजेशन को लेकर वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि मैं हर मैच से पहले सोचता हूं कि किस गेंदबाज के खिलाफ मुझे किस तरह बल्लेबाजी करनी है। अगर मैच में कोई खास परिस्थिति आती है, तो उसमें मैं क्या करूंगा, इसकी भी पहले से कल्पना करता हूं। इससे काफी मदद मिलती है और मानसिक रूप से मजबूती मिलती है। जब आपको पहले से पता होता है कि अलग-अलग परिस्थितियों में क्या करना है, तो आत्मविश्वास बढ़ता है। इसलिए माइंड को मजबूत रखना बहुत जरूरी है।

फैंस के सपोर्ट को शब्दों में बयां नहीं कर सकता

फैंस के समर्थन पर वैभव ने कहा कि जिस तरह से फैंस मुझे सपोर्ट करते हैं, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। मैदान पर खेलते समय भी और सोशल मीडिया पर भी मुझे लोगों का भरपूर प्यार और समर्थन मिला है। यह मेरे लिए बेहद खास है।

वैभव ने कहा कि जब मैं पटना एयरपोर्ट पर उतरता हूं, तो ऐसा महसूस होता है कि अब घर आ गया हूं। मन में एक अलग तरह की सुरक्षा और सुकून का एहसास होता है। जब मैं बिहार में होता हूं, तो मन करता है कि कभी भी पैदल निकलकर घूमूं। यहां के लोगों का अपनापन अलग ही है। किसी अनजान व्यक्ति से भी बात कीजिए, तो ऐसा लगता है जैसे वर्षों से जानते हों। लोग बेहद सम्मान के साथ बात करते हैं और मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। यही चीज बिहार को मेरे लिए खास बनाती है।

लाइसेंस मिलने के बाद ही कार चलाऊंगा

IPL में गाड़ी मिलने पर उन्होंने कहा कि 3 साल तक अभी मैं उसे पास रखूंगा। लाइसेंस मिलने के बाद ही चलाऊंगा। तब तक मैं पापा को गाड़ी चलाने के लिए बोलूंगा और बगल में बैठूंगा।

सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले भारतीय बन सकते हैं वैभव

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शेफाली ने 15 साल 239 दिन की उम्र में भारत के लिए पहला मैच खेला था। सचिन तेंदुलकर ने 16 साल 205 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। वैभव को अगर इंग्लैंड-आयरलैंड टूर या एशियन गेम्स में एक भी मैच खेलने का मौका मिल जाता है तो वे शेफाली और सचिन दोनों को पीछे छोड़कर भारत के लिए खेलने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन जाएंगे।

वैभव के साथ इंग्लैंड-आयरलैंड जाएंगे उनके माता-पिता

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के माता-पिता भी इंग्लैंड और आयरलैंड जाएंगे। BCCI ने वैभव के माता-पिता को टीम के साथ यात्रा करने को कहा है। बोर्ड का कहना है कि इससे वह सीनियर टीम के माहौल में आसानी से ढल जाएंगे। BCCI सचिव देवजीत सैकिया (BCCI Secretary Devajit Saikia) ने कहा कि आमतौर पर बोर्ड खिलाड़ियों के माता-पिता को टीम के साथ दौरे पर जाने की अनुमति नहीं देता। लेकिन वैभव नाबालिग हैं और पहली बार सीनियर खिलाड़ियों वाली टीम का हिस्सा बन रहे हैं, इसलिए उनके मामले में विशेष अनुमति दी गई है।

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