उत्तर प्रदेश के कानपुर में सिर्फ 16 रुपये का डिस्काउंट देने वाले कपड़ा कारोबारी और उसके भाई की गिरफ्तारी को अदालत ने पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया और मनमाने ढंग से गिरफ्तारी करने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। अदालत ने दोनों आरोपियों को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में सिर्फ 16 रुपये का डिस्काउंट देने वाले कपड़ा कारोबारी और उसके भाई की गिरफ्तारी को अदालत ने पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया और मनमाने ढंग से गिरफ्तारी करने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। अदालत ने दोनों आरोपियों को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।
जन्मदिन के ’16 रुपये वाले ऑफर’ से मची थी भगदड़
बासमंडी, अनवरगंज स्थित ‘आलम मार्ट’ के संचालक रईस आलम ने अपने जन्मदिन के मौके पर सोशल मीडिया पर एक आकर्षक विज्ञापन पोस्ट किया था। आपको बता दें कि इस ऑफर के तहत 16 अगस्त की आधी रात को मात्र 16 मिनट के लिए कपड़े और अन्य सामान सिर्फ 16 रुपये में बेचे जाने थे। यह रील देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई। नतीजा यह हुआ कि 15 अगस्त की रात 11 बजे ही दुकान के बाहर 3,000 से अधिक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ अनियंत्रित होने पर जब शटर गिराया गया, तो लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस गंभीर हालात को संभालने के लिए सात थानों की पुलिस फोर्स को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई और कई लोगों को गंभीर चोटे भी आई।
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
आपको बता दें कि इस घटना के बाद अनवरगंज पुलिस ने शांति भंग करने और जनता की जान जोखिम में डालने के आरोप में रईस आलम और उसके भाई सलमान आलम को गिरफ्तार करके जेल भेजने की तैयारी की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने जिन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है, उनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की गाइडलाइंस के अनुसार, ऐसे मामलों में बिना नोटिस दिए सीधे गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए पुलिस की कार्रवाई को कानून के सिद्धांतों के खिलाफ माना। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि पुलिस ने गिरफ्तारी की तय कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन किया है।