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आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत आत्महत्या नहीं, मोदी जी की एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की देन है : राहुल गांधी

'सॉरी मम्मी-पापा... मेरे अंदर दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है'। ये 18 साल की आकांक्षा चतुर्वेदी के आखिरी शब्द हैं, जिसने NEET पेपर लीक से आहत होकर अपनी जान दे दी। आकांक्षा चतुर्वेदी डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन पेपर लीक ने उसका सपना तोड़ दिया। एक परिवार को तबाह कर दिया,जिंदगी भर का जख्म दे दिया।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। ‘सॉरी मम्मी-पापा… मेरे अंदर दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है’। ये 18 साल की आकांक्षा चतुर्वेदी के आखिरी शब्द हैं, जिसने NEET पेपर लीक से आहत होकर अपनी जान दे दी। आकांक्षा चतुर्वेदी डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन पेपर लीक ने उसका सपना तोड़ दिया। एक परिवार को तबाह कर दिया,जिंदगी भर का जख्म दे दिया। बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए आकांक्षा के किसान पिता ने 3 लाख रुपए का लोन लिया, नागपुर में कुक की नौकरी की, लेकिन पेपर लीक ने उनसे उनकी बेटी ही छीन ली।

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डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी आकांक्षा : राहुल गांधी

इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर 3 लाख रुपये का कर्ज़ लिया और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहां coaching कर सके।

मोदी जी आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया , उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है

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एक पिता ने जो कर सकता था, सब किया। फिर NEET पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई। राहुल गांधी ने लिखा कि आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं – मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं। फिर वही कमेटी। वही ट्रांसफर। वही जाँच। न सुधार, न न्याय। राहुल गांधी ने लिखा कि मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती, आती-जाती रहती है, लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।

NEET पेपर लीक अब तक 6 बच्चों की जान ले चुका है, लेकिन नरेंद्र मोदी के मुंह से एक शब्द नहीं फूट रहा

NEET पेपर लीक अब तक 6 बच्चों की जान ले चुका है- लेकिन नरेंद्र मोदी के मुंह से एक शब्द नहीं फूट रहा।

• प्रदीप मेघवाल- राजस्थान
• अंशिका पांडे- दिल्ली
• ऋतिक मिश्रा- उत्तर प्रदेश
• सिद्धार्थ हेगड़े- गोवा
• भाग्यश्री- कर्नाटक
• आकांक्षा चतुर्वेदी- मध्य प्रदेश

ये खुदकुशी नहीं- ‘मर्डर’ है, जिसे मोदी सरकार के करप्ट सिस्टम ने अंजाम दिया है। इसके जिम्मेदार नरेंद्र मोदी और धर्मेंद्र प्रधान हैं।

देश पूछ रहा है?

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NEET पेपर लीक आखिर कितने मासूमों की जान लेगा?

नरेंद्र मोदी पेपर लीक के जिम्मेदारों को क्यों बचा रहे हैं?

पेपर लीक के गुनहगारों को आखिर कब सजा मिलेगी?

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से कब इस्तीफा देंगे?

 

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