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राहुल गांधी के धरने पर बैठते यूं ही नहीं केंद्रीय मंत्री बात करने पहुंचे थे? मोदी सरकार का विपक्ष से प्यार नहीं बल्कि ये है डर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अचानक मंगलवार को को नई दिल्ली में 7 लोक कल्याण मार्ग पर स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उनकी इस योजना का किसी को भी अंदाज़ा नहीं था। मीडिया को तभी पता चला, जब वह धरने पर बैठ गए। इस दौरान सबसे अहम बात यह रही कि प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh, Minister of State in the Prime Minister's Office) तत्काल राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से बातचीत करने पहुंच गए।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition in Lok Sabha) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अचानक मंगलवार को को नई दिल्ली में 7 लोक कल्याण मार्ग पर स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उनकी इस योजना का किसी को भी अंदाज़ा नहीं था। मीडिया को तभी पता चला, जब वह धरने पर बैठ गए। इस दौरान सबसे अहम बात यह रही कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh, Minister of State in the Prime Minister’s Office) तत्काल राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से बातचीत करने पहुंच गए।

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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के 2014 में सत्ता संभालने के बाद ऐसा विरले ही देखने को मिला है कि विपक्ष के विरोध पर सरकार ऐसी हरकत में आई हो। राजनीतिक विश्लेषक मोदी सरकार (Modi Government) की इस ‘विनम्रता’ को बहुत अहम मान रहे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University) में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार (Professor Ashutosh Kumar) ने कहा कि संसद में बहस के लिए तत्काल तैयार हो जाना, बताता है कि मोदी सरकार दबाव में है। प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार (Professor Ashutosh Kumar) ने बताया कि भारत की डेमोग्राफ़ी देखिए तो युवा अच्छी संख्या में हैं। यूथ ही मोदी का समर्थक रहा है, लेकिन इस आंदोलन के बाद अब बीजेपी को युवा वोट बैंक खोन का डर सता रहा है। नीट मिडिल क्लास का मुद्दा है जो कि 20 से 25 पर्सेंट है और मोदी समर्थक रहा है।

प्रोफ़ेसर आशुतोष ने कहा कि मिडिल क्लास बहुत महत्वाकांक्षी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार (Modi Government) की तत्काल प्रतिक्रिया से विपक्ष से प्यार नहीं है बल्कि उनका अपना डर है। पीएम मोदी (PM Modi) के न खाऊंगा न खाने दूंगा के नारे का वो तिलिस्म टूटता दिख रहा है। इस आंदोलन के बाद सरकार को अब यह बात समझनी पड़ रही है कि बहुत मुगालते नहीं रहा जा सकता है।

बता दें कि सरकार के लिए वेकअप कॉल है। पेपर लीक से अर्बन और मिडिल क्लास को नुक़सान हुआ है। समर्थ और मज़बूत सरकार की छवि कमज़ोर हुई है। सरकार अब बहस भी करने के लिए तैयार है। राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को मंगलवार शाम देश के सारे टीवी चैनलों ने प्रमुखता से दिखाया। धारणा है कि भारत में जनादेश के निर्माण में टीवी चैनलों की अहम भूमिका होती है।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) ने कहा कि यह उन दुर्लभ दिनों में से एक है, जब राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  लगभग हर समाचार बुलेटिन के केंद्र में हैं। इस बार बदलाव यह है कि विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार बचाव की मुद्रा में है और सवालों के जवाब दे रही है। राजदीप सरदेसाई ने कहा कि पब्लिक परशेप्सन में सरकार कटघरे में आ गई है और यह बहुत ही अहम चीज़ है।

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राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है। ऐसे में मीडिया बहुत दिनों तक सरकार के साथ खड़े नहीं रह सकता है। पब्लिक परशेप्सन में सरकार कटघरे में है। ऐसे में सरकार ऐसा नहीं दिख सकती है कि वह बातचीत तक करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को बातचीत करनी पड़ी क्योंकि आज के ज़माने में ऑपटिक्स बहुत अहम होती है। यानी धारणा बहुत अहम होती है। इसीलिए जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से बातचीत करने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि मैं ये नहीं कहूंगा कि नरेंद्र मोदी की छवि कमज़ोर हुई है क्योंकि चुनाव तो बीजेपी ही जीत रही है। इतना ज़रूर है कि लोगों में थकावट है। लोगों के पास सवाल हैं। जेन ज़ी ने तो होश संभालने के बाद नरेंद्र मोदी के अलावा किसी और को पीएम के रूप में देखा ही नहीं। लोगों की थकावट ग़ुस्सा में बदलती है या नहीं यह अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है।

राजदीप ने कहा कि विपक्ष का नेता अगर प्रधानमंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन करेगा तो मीडिया को कवरेज देना ही होगा। इसका फ़ायदा भी हुआ। मीडिया इसकी उपेक्षा नहीं कर सकता था। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या राहुल गांधी उन्हें चुनौती देने में सक्षम हैं?

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