तमिलनाडु में राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए 18 जून, 2026 को उपचुनाव होगा। इस सीट पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) की पार्टी टीवीके आसानी से अपना उम्मीदवार खड़ा करके जीत सकती थी। संसद के किसी भी सदन में इस नई-नवेली पार्टी का अभी कोई प्रतिनिधित्व भी नहीं है, लेकिन, सीएम विजय ने अपनी पार्टी का उम्मीदवार देने की जगह यह सीट सहयोगी कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ दी है, तो इसके बीचे दूर की सोच है।
नई दिल्ली: तमिलनाडु में राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए 18 जून, 2026 को उपचुनाव होगा। इस सीट पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) की पार्टी टीवीके आसानी से अपना उम्मीदवार खड़ा करके जीत सकती थी। संसद के किसी भी सदन में इस नई-नवेली पार्टी का अभी कोई प्रतिनिधित्व भी नहीं है, लेकिन, सीएम विजय ने अपनी पार्टी का उम्मीदवार देने की जगह यह सीट सहयोगी कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ दी है, तो इसके बीचे दूर की सोच है।
कांग्रेस पार्टी की ओर से सियासी गलियारों में इसे तमिलनाडु के सीएम विजय की दरियादिली के तौर पर पेश किया जा रहा है। लेकिन सी जोसेफ विजय अब प्रदेश की राजनीति में इतने कच्चे खिलाड़ी भी नहीं रह गए हैं। बता दें कि कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जो उम्मीदवार राज्यसभा जाएगा, उसका कार्यकाल मात्र दो साल का ही रहेगा। मतलब, सीएम विजय ने दो साल के लिए कांग्रेस को राज्यसभा में एक सीट की गारंटी देकर 2029 के लोकसभा चुनावों में सीटों पर तालमेल के लिए अभी से अपना हाथ ऊपर कर लिया है। तमिलनाडु में लोकसभा की कुल 39 सीटें हैं, जो महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद सबसे ज्यादा हैं।
मतलब, थलपति सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के लिए लोकसभा चुनावों में सहयोगियों से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावा करने का राजनीतिक दबदबा बना रहेगा।
कांग्रेस और सहयोगियों के समर्थन से विजय सरकार
तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय को पता है कि उनकी सरकार को विधानसभा में अपने दम पर बहुमत नहीं है। उनकी टीवीके पार्टी को समर्थन देने वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 5 विधायक हैं। डीएमके गठबंधन के अन्य सहयोगियों, जैसे कि मुस्लिम लीग और सीपीएम-सीपीआई जो टीवीके सरकार को समर्थन दे रही हैं, उसके पीछे भी कांग्रेस है और यह सारे दल राष्ट्रीय स्तर पर उसकी अगुवाई वाले इंडी अलायंस के पार्टनर भी हैं। कांग्रेस की वजह से ही इन दलों ने इसके लिए तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके से पंगा भी ले लिया है।