जापान के लोग न केवल दुनिया में सबसे लंबी जिंदगी जीते हैं, बल्कि ढलती उम्र में भी बेहद स्वस्थ और सक्रिय नजर आते हैं। वहां 100 वर्ष की आयु पार कर चुके लोगों की संख्या काफी अधिक है। आमतौर पर दुनिया भर में यह माना जाता है कि बहुत ज्यादा और भारी पौष्टिक खाना खाने से बीमारियां दूर रहती हैं। हालांकि, जापानी जीवनशैली का मानना इसके बिल्कुल उलट है। उनके अनुसार, जरूरत से ज्यादा या भारी भोजन शरीर को पोषण देने के बजाय पाचन तंत्र पर एक अतिरिक्त बोझ बना देता है।
नई दिल्ली। जापान के लोग न केवल दुनिया में सबसे लंबी जिंदगी जीते हैं, बल्कि ढलती उम्र में भी बेहद स्वस्थ और सक्रिय नजर आते हैं। वहां 100 वर्ष की आयु पार कर चुके लोगों की संख्या काफी अधिक है। आमतौर पर दुनिया भर में यह माना जाता है कि बहुत ज्यादा और भारी पौष्टिक खाना खाने से बीमारियां दूर रहती हैं। हालांकि, जापानी जीवनशैली का मानना इसके बिल्कुल उलट है। उनके अनुसार, जरूरत से ज्यादा या भारी भोजन शरीर को पोषण देने के बजाय पाचन तंत्र पर एक अतिरिक्त बोझ बना देता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञो और जापानी परंपराओं के विश्लेषण से यह बात साफ हुई है कि कम और हल्का खाना ही लंबी और निरोगी जिंदगी की असली कुंजी है।
‘हरा हाची बू’ का पारंपरिक नियम
जापानी संस्कृति में खान-पान से जुड़ा एक पारंपरिक नियम बेहद लोकप्रिय है, जिसे ‘हरा हाची बू’ कहा जाता है। इस नियम का सरल अर्थ है। हमेशा अपना पेट केवल 80 प्रतिशत ही भरें। जैसे ही आपको लगे कि आपका पेट लगभग भर चुका है, तुरंत खाना बंद कर दें। जब हम पेट भरकर या क्षमता से अधिक भोजन कर लेते हैं, तो हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) को उसे पचाने में दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। इससे शरीर जल्दी थकान महसूस करने लगता है और अंदरूनी अंगों की कार्यक्षमता समय से पहले घटने लगती है।
कम और सादा भोजन क्यों है फायदेमंद?
जापानी लोग अत्यधिक तली-भुनी, मसालेदार या भारी चीजों की जगह सादा, उबला हुआ और सुपाच्य भोजन पसंद करते हैं। कम कैलोरी वाला संतुलित आहार लेने से शरीर की कोशिकाएं (Cells) लंबे समय तक स्वस्थ और जवान बनी रहती हैं। इस तरह की संयमित खान-पान की आदत से मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और दिल की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक टल जाता है।
भोजन करने का सही तरीका और छोटी प्लेटों का जादू
दीर्घायु होने के लिए केवल यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खाते हैं, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि आप कैसे खाते हैं। जापानी लोग कभी भी जल्दबाजी में भोजन नहीं करते। वे शांत होकर चबा-चबाकर खाते हैं, जिससे दिमाग को पेट भरने का सही संकेत समय पर मिल जाता है। इसके अलावा, वे खाना परोसने के लिए छोटी प्लेटों और कटोरियों का इस्तेमाल करते हैं। छोटे बर्तनों के प्रयोग से थाली में भोजन स्वाभाविक रूप से कम आता है, जिससे व्यक्ति अनजाने में होने वाली ‘ओवरईटिंग’ से आसानी से बच जाता है।
एक लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स या अत्यधिक गरिष्ठ भोजन की जरूरत नहीं है। इसके लिए बस अपने खाने की मात्रा और तरीके पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसा कि जापानी जीवनशैली का मूल मंत्र है—’कम खाओ, सही खाओ और लंबा जियो।’ अपनी दैनिक जीवनशैली में इस छोटी सी आदत को शामिल करके कोई भी व्यक्ति गंभीर बीमारियों से बचकर एक खुशहाल और लंबी जिंदगी का आनंद ले सकता है।
रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा