केंद्र सरकार ने आनेवाले त्योहारों के सीजन में चीनी की बढ़ती मांग को पूरा करने और इसकी रिकॉर्ड कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा कार्य योजना तैयार किया है। चीनी उद्योग और सरकार के बीच बनी सहमति के अनुसार, इस साल चीनी मिलें अपने तय शेड्यूल से 10 से 15 दिन पहले यानी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से पेराई सत्र शुरू कर देंगी। सरकार ने यह कदम त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने के लिए उठाया है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आनेवाले त्योहारों के सीजन में चीनी की बढ़ती मांग को पूरा करने और इसकी रिकॉर्ड कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा कार्य योजना तैयार किया है। चीनी उद्योग और सरकार के बीच बनी सहमति के अनुसार, इस साल चीनी मिलें अपने तय शेड्यूल से 10 से 15 दिन पहले यानी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से पेराई सत्र शुरू कर देंगी। सरकार ने यह कदम त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने के लिए उठाया है।
त्योहारी सीजन में कैसी रहेगी सप्लाई?
चीनी मिलों के जल्द शुरू होने से दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले बाजार में नई चीनी की आपूर्ती शुरू हो जाएगी, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह सुचारू रहेगी।इसके अलावा ISMA और NFCSF जैसे चीनी संगठनों ने अपनी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक पर्याप्त और उपलब्ध है।
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के तीन कड़े कदम
कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में कृत्रिम कमी को रोकने के लिए सरकार ने कई सख्त नियम लागू किए हैं—
सख्त स्टॉक लिमिट
इसके अनुसार, सरकार ने डीलरों और थोक विक्रेताओं के लिए 4,000 क्विंटल यानी 400 टन की अधिकतम स्टॉक सीमा तय कर दी है। आपको बता दें कि यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होकर 30 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा।
30 दिनों का रोटेशन नियम
इस नियम के मुताबिक, कोई भी व्यापारी चीनी को डंप न कर सके, इसके लिए डीलरों को नया स्टॉक प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उसे बाजार में बेचना अनिवार्य होगा।
निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध
इस तिसरे नियम के अनुसार, घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर लगी रोक को आगे बढ़ा दिया है।
आपको बता दें कि समय से पहले गन्ने की पेराई करने से चीनी की रिकवरी कम होती है, जिससे मिलों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इस वित्तीय नुकसान से बचने के लिए चीनी मिलों ने CGST में अस्थायी छूट, अतिरिक्त बिक्री कोटा, गुड़-खांडसारी पर आंशिक रोक के लिए सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं।