यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Elections) से पहले राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह (National President Chaudhary Jayant Singh) को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। डॉ. रामाशीष राय (Dr. Ramashish Rai) ने प्रदेश अध्यक्ष व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अचानक इस्तीफा दिया है।
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Elections) से पहले राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह (National President Chaudhary Jayant Singh) को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। डॉ. रामाशीष राय (Dr. Ramashish Rai) ने प्रदेश अध्यक्ष व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अचानक इस्तीफा दिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह (National President Chaudhary Jayant Singh) को संबोधित पत्र में डॉ. रामाशीष राय (Dr. Ramashish Rai) ने लिखा कि पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मुझे सौंपने के लिए मैं आपका हृदय से आभारी हूं। इस दायित्व का निर्वहन करते हुए मैंने अपनी सामर्थ्य व क्षमता के अनुसार संगठन को सुदृढ बनाने का प्रयास किया। प्रदेश के विभिन्न जनपदों का व्यापक दौरा किया। कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया। संगठन के विस्तार और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया।
डॉ. रामाशीष राय (Dr. Ramashish Rai) ने लिखा कि मैं राजनीति, में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था। उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने “संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो स्वप्न देश के सामने रखा था. यह आज भी अधूरा प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज को जाति, उपनाति और संप्रदाय के आधार पर विभावित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा बनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है। देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए ‘जाति तोड़ी, समाज जोड़ी” का संदेश दिया था। दुर्भाग्यवश आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं जो सामाजिक विभावन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित तीनों के लिए बातक है।
उन्होंने लिखा कि भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी राजनीति और चुनानों में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था। आज उनकी आशंकाएं काफी हद तक सत्य सिद्ध होती विखाई दे रही हैं। राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता के स्थान पर आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को निरंतर क्षति पहुंच रही है। यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए चिंताजनक है।
डॉ. रामाशीष राय (Dr. Ramashish Rai) ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है। व्यक्ति से बड़ा दल और दल से कड़ा देश, इन्ही वैचारिक व नैतिक करणों से, मैं राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर रहा हूं।