Taslima Nasreen : बांग्लादेश की मशहूर राइटर तसलीमा नसरीन करीब 19 साल बाद कोलकाता लौटी हैं। साल 2007 में अपनी किताब ‘द्विखंडितो’ को लेकर हुए विरोध के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था। तब से यह उनकी शहर में पहली सार्वजनिक वापसी है। अब वह 1 अगस्त को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और मशहूर साहित्यकार शिर्षेंदु मुखोपाध्याय के भी शामिल होने की संभावना है।
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इसके पहले मशहूर लेखिका को 2007 में शहर छोड़कर निकलना पड़ा था, जब कट्टरपंथियों ने उनकी बंगाल में मौजूदगी पर ऐतराज जताया था। उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद तब की लेफ्ट सरकार ने उन्हें बंगाल से बाहर निकल जाने को कहा था। फिर 2011 में टीएमसी की सरकार आई थी, लेकिन तसलीमा नसरीन की वापसी नहीं हो सकी।
तसलीमा नसरीन महिलाओं के मुद्दे पर लिखती रही हैं। इसके अलावा कट्टरपंथ के खिलाफ भी उनकी कलम चलती रही है, लेकिन यही उनकी मुसीबत की वजह भी बनी है।
कोलकाता पहुंचने के बाद तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि घर लौटने जैसा है. उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपने ही देश लौट रही हूं। बंगाल कभी मेरे दिल में बंटा नहीं। मैं मेहमान बनकर नहीं, बल्कि बंगाल का हिस्सा बनकर लौटी हूं।”
तसलीमा ने बीते दिन कहा कि 2007 में उन्होंने अपनी इच्छा से कोलकाता नहीं छोड़ा था, बल्कि तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था।