नई दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत इस वक्त जोड़-तोड़ और समर्थन के दौर से गुजर रही है। सबसे बड़ा वोट बैंक जुटाने वाला थलपति विजय बहुमत से चंद कदम दूर रह गए हैं और यही दूरी उन्हें सत्ता पर काबिज होने के लिए भारी पड़ रही है। TVK प्रमुख थलपति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) ने आज जब दोबारा मुलाकात की, तो राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने फिर से वही बात दोहराई है कि पहले 118 हस्ताक्षरों लेकर आइए। अभी भी हस्ताक्षरों की कमी है। आप साबित कीजिए कि टीवीके (TVK) के पास स्पष्ट बहुमत है तभी शपथ ग्रहण हो सकेगा।
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दूसरी ओर, CPI की तमिलनाडु इकाई ने राज्यपाल के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा है कि संविधान के मुताबिक सबसे बड़ी पार्टी को विधानसभा के फ्लोर पर बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। CPI ने कहा कि TVK को शपथ से पहले बहुमत साबित करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
केरल यात्रा पर नहीं जा रहे हैं राज्यपाल
राज्य में यह चर्चा भी थी कि तमिलनाडु के राज्यपाल केरल जा सकते हैं, लेकिन लोक भवन ने साफ किया है कि राज्यपाल फिलहाल चेन्नई में ही हैं और अभी केरल यात्रा की कोई योजना नहीं है। कुल मिलाकर तमिलनाडु की राजनीति अब तीन सवालों पर अटकी है, क्या विजय 118 विधायकों का समर्थन जुटा पाएंगे? क्या VCK उनके साथ जाएगी और क्या राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को फ्लोर टेस्ट का मौका देंगे या पहले ही बहुमत के दस्तावेजी प्रमाण पर अड़े रहेंगे।
उधर Communist Party of India की तमिलनाडु राज्य कार्यकारिणी ने बयान जारी कर कहा है कि राज्यपाल को संविधान के अनुसार कार्य करना चाहिए। पार्टी ने कहा कि चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में संवैधानिक परंपराओं के मुताबिक टीवीके को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए।
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M. Veerapandian, Communist Party of India (CPI) #TamilNadu State Secretary, releases a press statement urging the Governor to give an opportunity to #TVK (@TVKVijayHQ) to prove its majority on the floor of the Assembly.
"In the 2026 Tamil Nadu Legislative Assembly election held… pic.twitter.com/NSY5ckLIUZ
— Lok Poll (@LokPoll) May 7, 2026
बहुमत परीक्षण पटल पर हो न कि राजभवन में: CPI
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सीपीआई ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के एसआर. बोम्मई फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत परीक्षण सदन के पटल पर होना चाहिए, न कि राजभवन में। पार्टी ने राज्यपाल से संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की भावना के अनुरूप निर्णय लेने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर एआईएडीएमके विधायकों को लेकर भी बड़ी हलचल सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक पुडुचेरी में ठहरे एआईएडीएमके विधायकों के कैंप को संभालने में एलजेके के महासचिव सुरेश अहम भूमिका निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि एआईएडीएमके विधायक लगातार आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं और उन्हें फिलहाल कुछ दिनों तक इंतजार करने को कहा गया है।
सूत्रों का दावा है कि कुछ एआईएडीएमके विधायक टीवीके के साथ जाने की स्थिति में उपमुख्यमंत्री पद और कैबिनेट में हिस्सेदारी चाहते थे, लेकिन ईपीएस इसके पक्ष में नहीं थे। इसके बाद अब कुछ विधायक डीएमके के साथ संभावनाएं तलाशने में भी जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पुडुचेरी में विधायकों को एकजुट बनाए रखने में एलजेके और एआईएडीएमके के कुछ वरिष्ठ नेता सक्रिय हैं। एआईएडीएमके की नेता लीमा रोजजो मार्टिन की पत्नी और जोस चार्ल्स मार्टिन की मां हैं, उन्हें भी इस पूरे ऑपरेशन के प्रमुख चेहरों में एक माना जा रहा है।
इस बीच टीवीके नेता वीएस बाबू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार गठन की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सकती है। हालांकि उन्होंने केंद्र सरकार के कथित दबाव से जुड़े सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।