लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। यह बजट पिछले वर्षों की तुलना में एक लाख करोड़़ रुपये ज्यादा है। योगी सरकार के इस बजट को लेकर सियासत शुरू हो गयी है। विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि, दमदार बजट से हमेशा के लिए सपा की साइकिल पंचर हो गई।
पढ़ें :- यूपी की जनता को एक बार फिर "सपनों का अमृत" पिलाया गया...योगी सरकार के बजट पर शिवपाल यादव का निशाना
सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव और उनके चाचा श्री शिवपाल यादव की साइकिल 'सबका साथ, सबका विकास' वाले दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई है। चाचा-भतीजा की हल्की बयानबाज़ी बेवजह अपना मजाक उड़वा रही है।
उनके लिए 2027 से 2047 तक सत्ता के दरवाज़े बंद दिख रहे हैं, तो उनकी बेचैनी लाज़मी…
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) February 11, 2026
पढ़ें :- यूपी बजट पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान, बोले-यह सरकार की विदाई वाला बजट, बेरोजगार और किसानों के लिए कुछ नहीं
केशव मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सपा बहादुर अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव की साइकिल ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाले दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई है। चाचा-भतीजा की हल्की बयानबाज़ी बेवजह अपना मजाक उड़वा रही है। उनके लिए 2027 से 2047 तक सत्ता के दरवाज़े बंद दिख रहे हैं, तो उनकी बेचैनी लाज़मी है। उन पर ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ वाली कहावत सटीक बैठती है। यूपी की जनता समझदार है। वह जवाब देना जानती है।
मौर्य जी, साइकिल पंचर की चिंता छोड़िए,
यूपी की जनता पूछ रही है – आपकी ‘डबल इंजन’ सरकार का विकास आखिर किस गड्ढे में फंस गया है?बजट में वादों की बरसात, ज़मीन पर बेरोज़गारी, महंगाई और बदहाल स्वास्थ्य-सड़क व्यवस्था की मार…
2047 के सपने दिखाने वाली सरकार 2026 की सच्चाई से भाग रही… pic.twitter.com/mYBP5B0vxV— Shivpal Singh Yadav (@shivpalsinghyad) February 11, 2026
पढ़ें :- योगी सरकार ने पहली बार सदन में पेश किया इकोनॉमिक सर्वे, राज्य में बढ़ी है प्रति व्यक्ति आय, जानिए डिटेल
वहीं, डिप्टी सीएम के इस बयान पर शिवपाल यादव ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि, मौर्य जी, साइकिल पंचर की चिंता छोड़िए, यूपी की जनता पूछ रही है-आपकी ‘डबल इंजन’ सरकार का विकास आखिर किस गड्ढे में फंस गया है? बजट में वादों की बरसात, ज़मीन पर बेरोज़गारी, महंगाई और बदहाल स्वास्थ्य-सड़क व्यवस्था की मार…2047 के सपने दिखाने वाली सरकार 2026 की सच्चाई से भाग रही है। याद रखिए – जनता प्रचार नहीं, प्रदर्शन देखती है और जब जनता जवाब देती है, तो बड़े-बड़े सिंहासन भी ‘पंचर’ हो जाते हैं। आप तो वैसे भी 2022 से अभी तक इस साइकिल की दी हुई चोट झेल रहे हैं।