Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई सपा की साइकिल…केशव मौर्य के बयान पर शिवपाल यादव बोले-वैसे भी 2022 से अभी तक…

दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई सपा की साइकिल…केशव मौर्य के बयान पर शिवपाल यादव बोले-वैसे भी 2022 से अभी तक…

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। यह बजट पिछले वर्षों की तुलना में एक लाख करोड़़ रुपये ज्यादा है। योगी सरकार के इस बजट को लेकर सियासत शुरू हो गयी है। विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि, दमदार बजट से हमेशा के लिए सपा की साइकिल पंचर हो गई।

पढ़ें :- वित्तीय वर्ष समाप्त होने में छह दिन शेष, 40 फीसदी नहीं खर्च हो पाया बजट , एक कार्यदिवस में पूरा बजट इस्तेमाल करना विभागों के लिए बना टेढ़ी खीर
पढ़ें :- BJP government UP: सीएम योगी बोले-नौ वर्षों में प्रदेश में 9 लाख से अधिक दी है सरकारी नौकरी

केशव मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सपा बहादुर अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव की साइकिल ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाले दमदार बजट से हमेशा के लिए पंचर हो गई है। चाचा-भतीजा की हल्की बयानबाज़ी बेवजह अपना मजाक उड़वा रही है। उनके लिए 2027 से 2047 तक सत्ता के दरवाज़े बंद दिख रहे हैं, तो उनकी बेचैनी लाज़मी है। उन पर ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ वाली कहावत सटीक बैठती है। यूपी की जनता समझदार है। वह जवाब देना जानती है।

पढ़ें :- हर जिले में जातीय पक्षपात के चलते अपने ही जाति के अधिकारियों की तैनाती कर स्वजातीय माफ़ियाओं और अपराधियों को दिया जा रहा संरक्षण: अखिलेश यादव

वहीं, डिप्टी सीएम के इस बयान पर शिवपाल यादव ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि, मौर्य जी, साइकिल पंचर की चिंता छोड़िए, यूपी की जनता पूछ रही है-आपकी ‘डबल इंजन’ सरकार का विकास आखिर किस गड्ढे में फंस गया है? बजट में वादों की बरसात, ज़मीन पर बेरोज़गारी, महंगाई और बदहाल स्वास्थ्य-सड़क व्यवस्था की मार…2047 के सपने दिखाने वाली सरकार 2026 की सच्चाई से भाग रही है। याद रखिए – जनता प्रचार नहीं, प्रदर्शन देखती है और जब जनता जवाब देती है, तो बड़े-बड़े सिंहासन भी ‘पंचर’ हो जाते हैं। आप तो वैसे भी 2022 से अभी तक इस साइकिल की दी हुई चोट झेल रहे हैं।

Advertisement