नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah ने परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा (Mata Bhagwati Devi Sharma) की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह 2026 में भाग लिया। इस दौरान उन्होने कहा कि भारतीय परंपरा और संस्कृति दुनिया की समस्याओं का समाधान प्रदान करती है। उत्तराखंड के हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार (All World Gayatri Famil) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अखंड ज्योति (unbroken light) की शताब्दी भी मनाई गई, जो एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार जल रही है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami के साथ गायत्री तीर्थ-शांतिकुंज में भी प्रार्थना की, जहां अखंड ज्योति स्थित है।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आज यहां अखंड ज्योति सम्मेलन (Akhand Jyoti Conference) में मैं अटूट ऊर्जा और शाश्वत प्रकाश महसूस कर रहा हूं। मेरा दिल जानता है कि मैं यहां से कितना प्रकाश और चेतना लेकर जाऊंगा। यह आस्था, आध्यात्मिकता और संस्कृति का संगम है। श्रीराम शर्मा ने चरित्र निर्माण को चुनकर इन तीनों को पुनर्जीवित किया। उन्होंने आत्मा को प्रबुद्ध करने का काम किया। अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य के पोते चिन्मय पंड्या की राष्ट्र निर्माण की प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और इतिहास में विश्वास करते हैं वह न केवल यह मानते हैं बल्कि उन्हें यह भी विश्वास है कि दुनिया की समस्याओं का समाधान भारतीय परंपरा में है। शाह ने कहा कि आज मैं यहां चिन्मय पंड्या को सलाम करने आया हूं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण की जो प्रतिज्ञा ली है वह महान है। गायत्री मंत्र, गायत्री साधना और अन्य सहित ऐसी परंपराओं से लोगों को जोड़ने में श्रीराम शर्मा के योगदान की प्रशंसा करते हुए अमित शाह ने लोगों से नई ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया। शाह ने आग्रह किया कि आज, पंडित राम शर्मा ने लाखों लोगों को गायत्री मंत्र, गायत्री पूजा और गायत्री साधना से जोड़ा। अब इन लाखों लोगों की ज़िम्मेदारी है कि वे अगले सौ वर्षों तक चिन्मय पंड्या के नेतृत्व में नई ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ें। अखिल विश्व गायत्री परिवार के 100 मिलियन से अधिक सदस्य हैं और सामाजिक सुधार के लिए हजारों वैश्विक केंद्र हैं।