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हरीश राणा के अंतिम संस्कार में शामिल हुए यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय, पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि की अर्पित

By Abhimanyu 
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Harish Rana’s Funeral : दिल्ली में हरीश राणा, जिन्हें भारत में पहली बार ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छा-मृत्यु) की अनुमति मिली थी, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने हरीश राणा के पार्थिव शरीर को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

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हरीश राणा पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “परिवार ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और अपने बच्चे को बचाने की हर संभव कोशिश की। परिवार ने अपने बच्चे के पाँच अंग दान किए हैं, जिससे पूरे देश को यह प्रेरणा मिली है कि एक बच्चा, जो इतने वर्षों तक बीमार रहा, उसने अंततः खुद को पूरी तरह से देश के लिए समर्पित कर दिया।”

13 साल से भी ज़्यादा समय तक कोमा में रहने के बाद, मंगलवार को AIIMS-दिल्ली में राणा का निधन हो गया। हरीश राणा भारत के ऐसे पहले मरीज़ थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दी गई थी। 31 साल के राणा, जो 2013 से कोमा में थे, उन्हें 14 मार्च को उनके गाज़ियाबाद स्थित घर से, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल की ‘पैलिएटिव केयर यूनिट’ में शिफ़्ट किया गया था।

बता दें कि हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद 14 मार्च को एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया था। इससे पहले 11 मार्च को अदालत ने माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए डॉक्टरों की निगरानी में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। जिसके बाद एम्स में विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई गई थी, जिसकी देखरेख में धीरे-धीरे हरीश को दी जा रही पोषण और जीवनरक्षक सहायता को हटाया गया। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को किसी प्रकार की तकलीफ न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया में मरीज को दी जा रही कृत्रिम सहायता जैसे पोषण, ऑक्सीजन और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाया जाता है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को किसी प्रकार का दर्द या असुविधा महसूस न हो। यह मामला देश में इच्छामृत्यु को लेकर कानूनी और नैतिक बहस को एक बार फिर सामने लेकर आया है।

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हरीश राणा चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र थे। साल 2013 में चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद वह कोमा में चले गए थे। तब से परिवार और डॉक्टर लगातार उनका इलाज कर रहे थे और उन्हें फूड पाइप व अन्य मेडिकल सपोर्ट के जरिए जिंदा रखा गया था।

 

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