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UP Election 2022 Special: बसपा के दिग्गज लगातर छोड़ रहे हैं पार्टी, 2007 के महारथी भी हाथी से उतरे

By शिव मौर्या 
Updated Date

UP Election 2022 Special: सोशल इंजीनियरिंग के मंत्र से 2007 में सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) लगातार कमजोर होती जा रही है। पार्टी के दिग्गज नेताओं को बसपा से लगातार मोहभंग होता जा रहा है। 2022 की तैयारियों में जुटी बसपा अपने दिग्गजों को रोक नहीं पा रही है। लिहाजा, एक-एक कर बसपा के दिग्गज नेता दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं। यही नहीं 2007 में बसपा (BSP) की सरकार बनने के बाद जिन्हें मंत्री पद से नवाजा, उनमें से भी ज्यादातर नेता बसपा (BSP) से दूरी बनाकर दूसरे दलों का दामन थाम लिए हैं। ऐसे में बसपा के सामने आने वाले चुनाव में बड़ी चुनौती होगी।

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बीते 10 सलों की बात करें तो बसपा के 100 से ज्यादा ​दिग्गज नेता पार्टी को अलविदा बोल चुके हैं। गुरुवार को भी बसपा के कद्दावर नेता व विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बता दें कि, 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा तीसरे नंबर की पार्टी बनी थी। बसपा ने 19 सीटें जीतीं थीं। अंबेडकरनगर के उपचुनाव में बसपा हार गई थी, जिसके कारण उसके पास संख्या 18 ही रह गई।

बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर करीब 9 विधायकों को निलंबित कर दिया। वहीं, लालजी वर्मा व राम अचल के निष्कासन से पार्टी में सिर्फ सात विधायक बचे हैं। एक और विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का एलान कर चुकी है। वहीं, अब बसपा विधानमंडल दल (BSP Legislature Party) के नेता व आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर विधानसभा  सीट (Mubarakpur Assembly seat) से विधायक शाह आलम उर्फ गुड्‌डू जमाली (MLA Shah Alam alias Guddu Jamali) ने भी आज अपने पद व पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

2007 के दिग्गजों ने भी किया किनारा
BSP ने 2007 के विधानसभा चुनाव में जिन दिग्गज नेताओं को मंत्री बनाकर महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए थे, उनमें से भी ज्यादातर नेताओं ने पार्टी को छोड़ दिया है। 2007 में बसपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, चौधरी लक्ष्मी नारायण, लालजी वर्मा, नकुल दुबे, रामवीर उपाध्याय, ठाकुर जयवीर सिंह, बाबू सिंह कुशवाहा, फागू चौहान, दद्दू प्रसाद, वेदराम भाटी, सुधीर गोयल, धर्म सिंह सैनी, इंद्रजीत सरोज, राम अचल राजभर, राकेश धर त्रिपाठी, राम प्रसाद चौधरी और सुखदेव राजभर को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे गए थे। हालांकि, इनमें से ज्यादातर नेता पार्टी में नहीं रहे। नकुल दुबे, सुधीर गोयल जैसे ही कुछ नेता पार्टी में बचे हुए हैं।

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