इस तरह की चोटें अब साधारण सी बात नहीं रह गई हैं, बल्कि इनमें हड्डियों का टूटना, Joint में नुकसान और ऑपरेशन तक की जरूरत शामिल होती है। ऐसी समस्या में कुछ छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखकर आप बड़ी समस्या से बच सकते हैं।जीवन प्रत्याशा
यह सोचकर कि दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है ऐसे में ये सोच स्थिति और खराब कर सकता है। अगर आपको साधारण चोट नहीं बल्कि फ्रैक्चर है तो कुछ ही दिनों में फ्रैक्चर और भी ज्यादा बिगड़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार , बुजुर्गों में फ्रैक्चर (Fractures in the elderly) बढ़ने की एक बड़ी वजह उम्र के साथ जीवन प्रत्याशा(Life expectancy) का बढ़ना है।
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ऑस्टियोपोरोसिस
आज लोग 70–80 साल की उम्र में भी खुद से चल-फिर रहे हैं और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। ऐसे में गिरने या फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis), विटामिन-डी की कमी (Vitamin D deficiency), आर्थराइटिस (Arthritis) और डायबिटीज (Diabetes) जैसी बीमारियां भी हड्डियों को कमजोर कर देती हैं, जिससे फ्रैक्चर का जोखिम (Risk of fracture) और ज्यादा बढ़ जाता है।
सामान्य लक्षण
फ्रैक्चर के सामान्य लक्षणों में गंभीर दर्द, सूजन, चलने या खड़े होने में अक्षमता और दृश्य विकृति शामिल हैं। अगर समय रहते इनका उपचार नहीं किया गया, तो अधिक समय तक बिस्तर पर रहने, संक्रमण, मांसपेशियों (Muscles) की हानि और जीवन की गुणवत्ता में कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
रोकथाम के उपाय
नियमित हड्डी घनत्व (Bone density) की जांच कराना
विटामिन डी के स्तर की निगरानी
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना
घर में गिरने से बचने के लिए उचित रोशनी और सहायक उपकरण लगाना
नियमित दृष्टि जांच कराना
संतुलन और शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम करना
नियमित रूप से हड्डी स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और चोट लगने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।