नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के मोती बाग स्थित सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने के बाद रेस्क्यू आपरेशन जारी है। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। उधर, इस मामले में अब पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि, हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। साथ ही, पूरी घटना की जांच के लिए सरकार ने विशेष कमेटी का गठन किया है।
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वहीं, पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है कि बिल्डिंग मालिक कौन है? पुलिस की जांच में सामने आया कि ये बिल्डिंग करीब 40 से 50 साल पुरानी है। इसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल छात्रों के पीजी के लिए होता था।
पुलिस ने बताया कि, जिस समय बिल्डिंग गिरी है उस दौरान उसके बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी मकान मालिक की पहचान आनंद बंसल के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम का रहने वाला बताया जा रहा है। वहीं, अभी तक 9 लोगों का रेस्क्यू किया गया है।
आखिर हादसों के बाद क्यों नहीं जागता प्रशासन?
देश में अक्सर इस तरह के हादसे होते रहते हैं लेकिन समय बीतने के बाद प्रशासन चुप्पी साध लेता है। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों की जान गयी थी। इसके बाद से अब दिल्ली में इस तरह की दर्दनाक घटना सामने आयी है। ऐसे में प्रशासन को बिल्डिंग मालिक के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पीजी के अलावा जर्जर घरों में भी रहते हैं छात्र
पीजी के अलावा छात्र किराए के कमरों में भी बड़ी संख्या में रहते हैं। राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहां भी मकान मालिक सबसे जर्जर कमरों को छात्रों को किराए पर देते हैं और छात्र इसमें रहने को मजबूर हैं। मकान मालिक समय पर किराया तो जरूर बढ़ा देते हैं लेकिन बिल्डिंग की मरम्मत नहीं कराते हैं। ऐसे में सरकार को इनके खिलाफ भी सख्त एक्शन लेना चाहिए ताकि इस तरह के हादसों से बचा जा सके।
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