नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टार्टअप इंडिया के एक दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा, नेशनल स्टार्टअप डे का ये अवसर, स्टार्टअप फाउंडर्स और इनोवेटर्स का ये समूह, मैं अपने सामने नए और विकसित होते भारत का भविष्य देख रहा हूं। आज से 10 साल पहले, विज्ञान भवन में 500–700 नौजवानों के बीच इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। उस समय स्टार्टअप की दुनिया में जो नए-नए लोग आ रहे थे, उनके अनुभव मैं सुन रहा था और मुझे याद है एक बेटी, जो कॉरपोरेट वर्ल्ड से अपनी नौकरी छोड़कर स्टार्टअप की तरफ जा रही थी।
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नौकरी छोड़कर वो कोलकाता अपनी मां से मिलने गई और मां से कहा कि मैंने नौकरी छोड़ दी है और मैं स्टार्ट करना चाहती हूं। फिर उसकी मां ने कहा, सर्वनाश… तुम बर्बादी की राह पर क्यों जा रही हो! स्टार्टअप को लेकर ये सोच हमारे देश में थी और आज हम कहां से कहां पहुंच गए, विज्ञान भवन से भारत मंडपम तक, जहां जगह नहीं है।
पीएम मोदी ने कहा, हमारे यंग इनोवेटर्स, जिन्होंने नए सपने देखने का साहस दिखाया, मैं उन सभी की बहुत-बहुत सराहना करता हूं। आज हम स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइलस्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं। 10 साल की ये जर्नी सिर्फ एक सरकारी योजना के सफल होने की कहानी नहीं है, ये आप जैसे हजारों-लाखों सपनों की जर्नी है। ये कितने ही सपनों के साकार होने की यात्रा है।
उन्होंने कहा, आप याद कीजिए, 10 साल पहले हालत क्या थे? इंडिविजुअल एफर्ट और इनोवेशन के लिए गुंजाइश ही नहीं थी। हमने उन परिस्थितियों को चैलेंज किया, हमने स्टार्टअप इंडिया लॉन्च किया और हमने युवाओं को खुला आसमान दिया, और आज नतीजा हमारे सामने है। सिर्फ 10 साल में स्टार्टअप इंडिया मिशन क्रांति बन चुका है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
साथ ही कहा, 10 साल पहले, देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, आज ये संख्या बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो गई है। 2014 में भारत में सिर्फ 4 यूनिकॉर्न थे, आज भारत में करीब सवा सौ सक्रिय यूनिकॉर्न हैं। दुनिया भी आज इस सक्सेस स्टोरी को हैरानी से देख रही है। आने वाले समय में जब भारत की सक्सेस स्टोरी की बात होगी, तब यहां बैठे कितने ही युवा खुद में एक ब्राइट केस स्टडी बनने वाले हैं। आज risk-taking, mainstream बन चुका है। Monthly salary से आगे सोचने वालों को अब केवल accept ही नहीं किया जाता, उन्हें अब respect किया जाता है। जिन risk-taking ideas को पहले लोग fringe मानते थे, वो अब fashion बन रहे हैं।
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पीएम मोदी ने कहा, Risk-taking पर मैं जोर देता रहा हूं, क्योंकि ये मेरी भी पुरानी आदत है। जो काम कोई करने को तैयार नहीं होता, जिन कामों को दशकों से पहले की सरकारों ने नहीं छुआ, क्योंकि उनमें चुनाव हारने और कुर्सी जाने का डर था… मैं उन कार्यों को अपना दायित्व समझकर जरूर करता हूं। आपकी तरह ही मेरी भी मानना है कि जो काम देश के लिए जरूरी है, वो काम किसी न किसी को तो करना ही होगा। किसी को तो Risk लेना ही होगा। नुकसान होगा तो मेरा होगा और अगर फायदा होगा तो मेरे देशवासियों को मिलेगा।